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Novo Nordisk India: Ozempic और Wegovy की कीमतों में भारी कटौती! भारतीय जेनेरिक दवाओं से सीधी टक्कर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Novo Nordisk India: Ozempic और Wegovy की कीमतों में भारी कटौती! भारतीय जेनेरिक दवाओं से सीधी टक्कर
Overview

Novo Nordisk India ने अपने ब्लॉकबस्टर डायबिटीज और वज़न घटाने वाली दवाओं, Ozempic और Wegovy, की कीमतों में भारी कटौती का ऐलान किया है। यह फैसला **1 अप्रैल, 2026** से लागू होगा, जिसमें Ozempic की शुरुआती डोज़ की कीमत **36%** और Wegovy की शुरुआती डोज़ की कीमत **48%** तक कम हो जाएगी।

कीमतों में भारी कटौती, जेनेरिक से मुकाबला

1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले इस बदलाव के तहत, Ozempic की शुरुआती डोज़ की कीमत 36% घटकर करीब ₹1,415 प्रति हफ़्ते हो जाएगी, जबकि Wegovy की शुरुआती डोज़ में 48% की कटौती के साथ यह कीमत भी ₹1,415 प्रति हफ़्ते पर आ जाएगी। कंपनी के सेमाग्लूटाइड (semaglutide) पर भारतीय पेटेंट के 20 मार्च को समाप्त होने के ठीक बाद यह कदम उठाया गया है। इस पेटेंट समाप्ति के कारण ही Sun Pharma, Dr. Reddy's Laboratories, Zydus Lifesciences और Glenmark Pharmaceuticals जैसी प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों को अपनी सस्ती जेनेरिक दवाएं लॉन्च करने का रास्ता साफ हो गया था।

रणनीति: ब्रांड वैल्यू बचाने की कोशिश

इस कदम के पीछे Novo Nordisk की अपनी प्रीमियम मार्केट पोजीशन और ब्रांड वैल्यू को बचाने की मंशा साफ दिख रही है। पहले जहां Ozempic और Wegovy की मासिक कीमत ₹8,800 से ₹16,400 तक हुआ करती थी, वहीं अब जेनेरिक दवाएं शुरुआती डोज़ के लिए ₹1,290 प्रति माह तक में उपलब्ध हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिय ने कहा कि इन कटौतियों का मकसद "बेस्ट-इन-क्लास कार्डियोमेटाबोलिक केयर को अधिक किफ़ायती बनाना" है, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा मरीजों तक इनकी पहुंच हो सके। हालांकि, इस रणनीति से इन दवाओं पर कंपनी के मुनाफे (profit margins) में कमी आ सकती है। भारत में GLP-1 दवाओं का बाज़ार 2025 में ₹1,000-1,200 करोड़ का था और इसके 2030 तक ₹5,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। Novo Nordisk इस बड़े बढ़ते बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा अपने नाम करना चाहती है।

भारत के GLP-1 बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा

भारत में GLP-1 दवाओं का बाज़ार तेज़ी से बदल रहा है, जिसकी मुख्य वजह टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामले हैं, जो 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रभावित करते हैं। पेटेंट ख़त्म होने के बाद से कीमतों की जंग छिड़ गई है। Zydus Life Sciences की Semaglyn करीब ₹2,200 प्रति माह में मिल रही है, जबकि Glenmark Pharmaceuticals का Glipiq हफ़्ते में ₹325 से ₹440 का है। Sun Pharmaceutical ने भी Noveltreat और Sematrinity को Novo Nordisk की मूल दवाओं से काफी कम कीमतों पर लॉन्च किया है। बाज़ार में Eli Lilly की Mounjaro (tirzepatide) भी एक बड़ा प्रतिस्पर्धी है, जिसने जनवरी 2026 में ₹113 करोड़ की बिक्री की, जबकि उसी अवधि में Wegovy की बिक्री ₹11 करोड़ थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते फाइनेंशियल ईयर 2027 में दवाओं की कीमतें 40-50% और फाइनेंशियल ईयर 2028 में 10-30% और गिर सकती हैं।

वैश्विक दबाव और स्टॉक पर असर

Novo Nordisk India की यह रणनीति वैश्विक बाज़ार की चुनौतियों और निवेशकों की सतर्कता के बीच आई है। कंपनी के ADR स्टॉक (NVO) में पिछले एक साल में करीब 46% की गिरावट आई है और यह अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर $35.10 के करीब कारोबार कर रहा है। वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती ब्याज दरें और दुनिया भर में GLP-1 दवाओं की गिरती कीमतें, जिनमें भारतीय जेनेरिक बाज़ार का योगदान भी है, इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। विश्लेषक (Analysts) भी ज़्यादातर सतर्क हैं, जहां 23 में से 18 ने 'Hold' रेटिंग दी है, और Deutsche Bank और Goldman Sachs जैसी फर्मों ने हाल ही में स्टॉक को डाउनग्रेड किया है। Novo Nordisk का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो गिरकर करीब 10x पर आ गया है, जो इसके पिछले स्तरों और इंडस्ट्री एवरेज से काफी कम है। यह निवेशकों की भविष्य की कमाई (earnings) और मुनाफ़े (profit margins) को लेकर चिंताएं दर्शाता है, क्योंकि इसकी प्रमुख दवाएं अब ज़्यादातर सामान्य, बदली जा सकने वाली उत्पादों की तरह बन गई हैं।

बाज़ार की ग्रोथ और भविष्य की राह

भारत का GLP-1 बाज़ार तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है, जिसके 2030 तक ₹5,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 2026 से 2033 के बीच 19.1% की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर (CAGR) रहने की संभावना है। भारत में Novo Nordisk की आक्रामक मूल्य कटौती इस प्रतिस्पर्धी माहौल को प्रबंधित करने की कुंजी है। यह कंपनी की बाज़ार में लीडर बने रहने की क्षमता पर निर्भर करेगा कि वह अपने मजबूत क्लिनिकल प्रमाणों (clinical evidence) और ब्रांड प्रतिष्ठा को जेनेरिक दवाओं की कम कीमतों के मुकाबले कैसे भुनाती है। जैसे-जैसे अन्य देशों में पेटेंट समाप्त होंगे, इसी तरह के बाज़ार बदलावों की उम्मीद है, जो Novo Nordisk के भारत में उठाए गए कदमों को वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति बचाने के एक प्रमुख संकेत के रूप में पेश करते हैं।

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