दिग्गज फार्मा कंपनी Novo Nordisk ने भारत में अपने कामकाज का मॉडल पूरी तरह बदल दिया है। Semaglutide के पेटेंट से छूट मिलने के बाद बढ़ते जेनेरिक कॉम्पिटिशन को देखते हुए कंपनी अब ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूशन के बजाय एडवांस्ड R&D और जीन थेरेपी पर फोकस कर रही है।
अपनी ब्लॉकबस्टर दवा Semaglutide के पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद, Novo Nordisk अब अपने भारतीय कारोबार को एक नई दिशा दे रही है। कंपनी का ध्यान अब पारंपरिक फार्मा डिस्ट्रीब्यूशन से हटकर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की तरफ शिफ्ट हो गया है। कंपनी जीन थेरेपी, mRNA टेक्नोलॉजी और AI-पावर्ड डायग्नोस्टिक टूल्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में स्थानीय साझेदारी तलाश रही है।
जेनेरिक कंपनियों से बढ़ती चुनौती
भारत में Ozempic और Wegovy जैसी लोकप्रिय दवाओं के प्रमुख घटक Semaglutide का पेटेंट खत्म होने से मार्केट में सस्ती जेनेरिक दवाओं की बाढ़ आ गई है। घरेलू कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के कारण मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए Novo Nordisk अब 'प्रिसिजन मेडिसिन' (Precision Medicine) की ओर बढ़ रही है ताकि अपने पोर्टफोलियो को मास-मार्केट प्रोडक्ट्स से अलग खड़ा कर सके।
'India for India' की नई चाल
कंपनी ने अपनी सप्लाई चेन को बेहतर बनाने और लागत को काबू में रखने के लिए 'India for India' स्ट्रेटेजी अपनाई है। इस योजना के तहत:
- लोकल मैन्युफैक्चरिंग: भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग और डेवलपमेंट हब तैयार करना।
- रणनीतिक साझेदारी: जीन थेरेपी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लिए भारतीय कंपनियों के साथ हाथ मिलाना।
- कॉस्ट मैनेजमेंट: सस्ती जेनेरिक दवाओं के सामने अपनी कॉम्पिटिटिवनेस बनाए रखना।
निवेशकों के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण होगा। कंपनी को जहां एक ओर नई टेक्नोलॉजी में निवेश का जोखिम उठाना है, वहीं दूसरी ओर जेनेरिक प्लेयर्स के साथ कीमत की जंग भी जारी रखनी है। आने वाले समय में कंपनी के पास इन हाई-टेक पहलों के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल्स और स्थानीय सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती होगी, जो कंपनी के भविष्य के ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी कदम साबित होंगे।
