भारत में जेनेरिक दवाओं की बहार
पिछले शुक्रवार को Novo Nordisk के एक्टिव इंग्रेडिएंट (Active Ingredient) Semaglutide पर लगे पेटेंट की अवधि समाप्त होते ही भारतीय दवा बाजार में बड़ा बदलाव आने वाला है। इस डेवलपमेंट के बाद कई भारतीय फार्मा कंपनियां अपनी Semaglutide दवाएं लॉन्च करने के लिए तैयार हैं। आपको बता दें कि वैश्विक Semaglutide मार्केट का आकार $68 बिलियन है, जिसमें भारत का हिस्सा लगभग $1 बिलियन के आसपास है।
Dr Reddy's Laboratories, Sun Pharma, Zydus Lifesciences, Torrent Pharma, Glenmark Pharma, USV, और Eris Lifesciences जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियों ने पहले ही अपनी Semaglutide दवाएं लॉन्च कर दी हैं। ये जेनेरिक दवाएं Novo Nordisk की ओरिजिनल दवाओं के मुकाबले 50% से 80% तक कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। Novo Nordisk की इन दवाओं की कीमत ₹2,200 से ₹8,900 प्रति सप्ताह या प्रति माह (फॉर्मूलेशन के आधार पर) तक आती थी।
Novo Nordisk की स्ट्रेटेजी
Novo Nordisk India के मैनेजिंग डायरेक्टर, विक्रांत श्रोत्रिय (Vikrant Shrotriya) ने कहा है कि कंपनी इस बदलते माहौल से निपटने के लिए 'अच्छी स्थिति में' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनी का फोकस केवल पेटेंट पर नहीं, बल्कि मरीजों तक दवा पहुंचाने पर है। श्रोत्रिय ने यह भी बताया कि कंपनी ने पिछले नवंबर में ही इंजेक्टेबल Semaglutide की कीमत में 37% की बड़ी कटौती की थी, ताकि बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके और मरीजों की पहुंच बढ़ाई जा सके।
कंपनी अपनी लोकल प्राइसिंग स्ट्रेटेजी (Localized Pricing) को भी लागू कर रही है और Semaglutide की रेंज को बढ़ाने के लिए पार्टनरशिप (Partnership) भी कर रही है। भारत में Novo Nordisk की दवाओं को Abbott द्वारा डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है, जिसने Ozempic की जेनेरिक दवा भी लॉन्च की है। इसके अलावा, Novo ने ओब्सिटी के लिए Wegovy की जेनेरिक दवा बनाने के लिए Emcure के साथ भी पार्टनरशिप की है। ये कदम Novo Nordisk की बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने की दृढ़ता को दर्शाते हैं, जहां वह प्रतिस्पर्धा के अनुसार खुद को ढाल रही है और मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है।
