Novo Nordisk और Eli Lilly की बड़ी तैयारी, भारत में जल्द आएगी वजन घटाने वाली Oral दवा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Novo Nordisk और Eli Lilly की बड़ी तैयारी, भारत में जल्द आएगी वजन घटाने वाली Oral दवा

ग्लोबल फार्मा कंपनियां Novo Nordisk और Eli Lilly ने भारत में वजन घटाने वाली ओरल (Oral) दवाओं को लॉन्च करने के लिए रेगुलेटर्स के पास आवेदन किया है। ये कंपनियां साल 2027 तक बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं। सुई से डरने वाले मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत हो सकती है, हालांकि भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में इनकी कीमत सबसे बड़ी चुनौती होगी।

दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनियां Novo Nordisk और Eli Lilly ने भारत में वजन घटाने वाली दवाओं के नए दौर की शुरुआत करने का फैसला किया है। इन्होंने रेगुलेटर्स के पास इन दवाओं के लिए प्रस्ताव भेजे हैं। ये दवाएं 'GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट' श्रेणी की हैं, जो शरीर में पेट भरने का अहसास कराने वाले हॉर्मोन की नकल करती हैं, जिससे भूख कम लगती है। अभी तक ये दवाएं ज्यादातर इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध हैं, जिन्हें मरीज को खुद नियमित रूप से लेना पड़ता है।

क्यों खास है ये ओरल दवा?

प्रस्तावित दवाएं डेली पिल्स (गोली) के रूप में होंगी, जो उन मरीजों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं जिन्हें सुई से डर लगता है या जो इंजेक्शन लेने में सहज नहीं हैं। मेडिकल जानकारों का मानना है कि सुई का डर बहुत से लोगों को वेट-मैनेजमेंट ट्रीटमेंट शुरू करने से रोकता है।

रेगुलेटरी और बाजार की चुनौतियां

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी 'सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) करेगा। अगर सब कुछ सही रहा, तो इन दवाओं की भारत में एंट्री 2027 तक हो सकती है। हालांकि, भारत में चुनौती कीमत की है। ऐसी एडवांस बायोलॉजिकल थेरेपी अक्सर काफी महंगी होती हैं। कंपनियों को इसे किफायती बनाने के साथ-साथ अपने मुनाफे का संतुलन भी बनाए रखना होगा।

साथ ही, इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर्स की कड़ी निगरानी में होना जरूरी है। डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि ये दवाएं वजन कम करने का कोई जादुई इलाज नहीं हैं, बल्कि इन्हें डाइट और एक्सरसाइज के साथ एक मेडिकल टूल की तरह ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

फार्मा सेक्टर में बढ़ेगा कॉम्पिटिशन

इन ग्लोबल दिग्गजों के आने से भारतीय फार्मा सेक्टर में कॉम्पिटिशन भी बढ़ेगा। फिलहाल मार्केट में वजन कम करने के लिए पुराने और जेनेरिक सप्लीमेंट्स मौजूद हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये कंपनियां कम कीमत वाले घरेलू प्लेयर्स को टक्कर दे पाएंगी और क्या वे भारतीय ग्राहकों को इन दवाओं के सुरक्षित उपयोग के लिए शिक्षित कर पाएंगी। निवेशक और डॉक्टर्स अब रेगुलेटरी मंजूरी की टाइमलाइन पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.