यह स्ट्रेटेजिक शिफ्ट बहुत महत्वपूर्ण है। Novartis अब सिर्फ क्लिनिकल ट्रायल करने तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साइंटिफिक डिस्कवरी के शुरुआती दौर में भी अहम भूमिका निभाएगी।
₹1,446 करोड़ का यह डिवेस्टमेंट, कंपनी की प्योर-प्ले इनोवेटिव मेडिसिन्स कंपनी बनने की ग्लोबल स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। भारत को अब बेसल (Basel) और अमेरिका के साथ एक प्रमुख ग्लोबल इनोवेशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
Novartis ने अहमदाबाद में फेज I क्लिनिकल रिसर्च शुरू कर दी है, साथ ही फेज II और III प्रोग्राम भी जारी हैं। यह कदम 70.68% हिस्सेदारी, जो प्राइवेट इक्विटी कंसोर्टियम (ChrysCapital के नेतृत्व में) को लगभग $159 मिलियन में बेची गई, कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी के अनुरूप है।
अपनी अनलिस्टेड सब्सिडियरी, Novartis Healthcare Private Limited के ज़रिए, कंपनी कटिंग-एज थेरेपीज़ पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी। भारत की भूमिका बढ़ रही है, खासकर कार्डियोवैस्कुलर थेरेपी Inclisiran (Sybrava) और प्रोस्टेट कैंसर ट्रीटमेंट Pluvicto जैसी दवाओं के ग्लोबल डेवलपमेंट में। हैदराबाद और मुंबई के डेवलपमेंट हब्स अब Novartis के ग्लोबल R&D इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा हैं।
प्रतिस्पर्धा और सरकारी सहयोग
Novartis वैश्विक स्तर पर Pfizer, Roche, AstraZeneca और Sanofi जैसी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करती है। भारत में, यह Sun Pharma और Dr. Reddy's Laboratories जैसे घरेलू दिग्गजों के साथ मुकाबला करेगी। हालांकि, इनोवेटिव मेडिसिन्स पर फोकस के साथ, कंपनी स्पेशियलिटी बायोलॉजिक्स, एडवांस ऑन्कोलॉजी और प्रिसिजन मेडिसिन में खुद को अलग पहचान देगी। भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा मेडटेक (PRIP) जैसी पहलें R&D इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा दे रही हैं।
पिछला इतिहास और वित्तीय स्थिति
Novartis ने पहले भी Sandoz जेनेरिक यूनिट और ऑप्थल्मोलॉजी ब्रांड्स को डिवेस्ट किया है। पिछले बारह महीनों में स्टॉक में 36.61% का रिटर्न देखा गया है, और कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $278 बिलियन है, जिसका P/E रेशियो 20.3 के आसपास है।
एनालिस्ट्स की राय और चुनौतियाँ
हालांकि, एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, एक 'Hold' रेटिंग और $141.20 का औसत प्राइस टारगेट है। कुछ चिंताएं अभी भी पाइपलाइन एसेट्स की क्लिनिकल व्यवहार्यता, बिक्री अनुमानों से संभावित कमी और नियामक जोखिमों को लेकर बनी हुई हैं। इनोवेटिव मेडिसिन्स से भारत का रेवेन्यू योगदान ($200-300 मिलियन) अमेरिका और यूरोप की तुलना में अभी भी कम है।
भविष्य की राह
कंपनी भारत में 9,000 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देती है और और भी मॉलिक्यूल लॉन्च करने की योजना बना रही है। मैनेजमेंट प्योर-प्ले इनोवेटिव मेडिसिन्स कंपनी बनने के अपने विजन पर कायम है, जो भविष्य के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को गति देने की उम्मीद है।
