यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मेडिकल और फार्मास्युटिकल इंपोर्ट के लिए आधिकारिक पोर्ट घोषित करने का प्रस्ताव दिया है। इससे एनसीआर में लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद है, हालांकि एयरपोर्ट अभी अपनी शुरुआती ऑपरेशनल फेज में है।
मेडिकल इंपोर्ट के लिए नया गेटवे
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अब दवाओं, मेडिकल डिवाइसेज और कॉस्मेटिक्स के आयात के लिए एक अधिकृत एंट्री पॉइंट बनाने की योजना है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए सप्लाई चेन को आसान बनाना है, जिससे एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरिंग हब के नजदीक क्लीयरेंस मिल सके।
कार्गो ऑपरेशंस और रणनीतिक महत्व
किसी भी एयरपोर्ट के लिए कार्गो हैंडलिंग रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया होती है। मेडिकल सामान के लिए आधिकारिक हब बनने से नोएडा एयरपोर्ट पर स्पेशलाइज्ड फ्रेट (Freight) की वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है। इससे पुराने और भीड़भाड़ वाले रूट्स से छुटकारा मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च में कमी आएगी। यह कदम भारत सरकार के लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को विकेंद्रीकृत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।
फाइनेंशियल स्थिति और चुनौतियां
नोएडा एयरपोर्ट का प्रबंधन Yamuna International Airport Private Limited कर रही है, जो Zurich Airport International AG की सहायक कंपनी है। 15 जून 2026 को कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के बाद से एयरपोर्ट अभी ग्रोथ फेज में है। मिड-2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को लगभग ₹28.6 करोड़ का EBITDA लॉस हुआ था।
हालांकि India Ratings and Research ने कंपनी की लोन सुविधाओं पर 'पॉजिटिव' आउटलुक के साथ 'IND A-' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन दिल्ली का Indira Gandhi International (IGI) Airport इसके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब सरकारी नोटिफिकेशन और एयरपोर्ट पर कस्टम्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के सेट-अप की गति पर नजर रखनी चाहिए। एयरपोर्ट कितनी जल्दी दिल्ली के IGI एयरपोर्ट से मार्केट शेयर छीन पाता है, यही इसकी भविष्य की कमाई और प्रॉफिटेबिलिटी तय करेगा।
