बायोसिमिलर (Biosimilar) दवाओं की एंट्री से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Nivolumab की कीमतों में भारी गिरावट आई है। अब यह दवा **₹30,000** प्रति साइकिल में उपलब्ध है, जो पहले **₹1 लाख** से अधिक थी।
भारत में कैंसर के इलाज की लागत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इम्यूनोथेरेपी दवा Nivolumab अब मरीजों की पहुंच में आ गई है, क्योंकि इसकी कीमत ₹1 लाख से घटकर लगभग ₹30,000 प्रति साइकिल रह गई है। यह भारी कटौती बायोसिमिलर दवाओं के बाजार में आने के कारण संभव हुई है, जो ओरिजिनल दवा के समान ही प्रभावी हैं लेकिन काफी कम कीमत पर उपलब्ध हैं।
मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय
टाटा मेमोरियल सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, Nivolumab लगभग 25 अलग-अलग प्रकार के ट्यूमर के इलाज में प्रभावी है। कुछ मामलों में, जैसे शुरुआती स्टेज के कोलोरेक्टल कैंसर में, यह इम्यूनोथेरेपी कीमोथेरेपी या सर्जरी जैसे आक्रामक विकल्पों से बचने में भी मदद कर सकती है।
अस्पतालों के सामने चुनौती
निवेशकों और हेल्थकेयर सेक्टर के लिए असली चुनौती 'इंस्टीट्यूशनल अडॉप्शन' (Institutional Adoption) की है। हालांकि मैन्युफैक्चरर स्तर पर कीमतें कम हो गई हैं, लेकिन अगर अस्पताल अपना मुनाफा बचाने के लिए महंगी ओरिजिनल दवाओं को ही स्टॉक करना जारी रखते हैं, तो मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। अस्पताल की प्रोक्योरमेंट पॉलिसी ही तय करेगी कि सस्ती दवा मरीज तक पहुंचेगी या नहीं।
सरकार का कड़ा रुख
नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर की 137 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को सीमित कर दिया है, जिससे मरीजों को सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
आगे का रास्ता
बाजार में 4 और नए बायोसिमिलर आने की तैयारी है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है। निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि अस्पताल कितनी जल्दी इन सस्ते विकल्पों को अपनाते हैं, क्योंकि यही फैक्टर आगे चलकर कैंसर केयर सेक्टर के प्राइसिंग मॉडल को तय करेगा।
