Niti Aayog का बड़ा ऐलान: 2035 तक भारत की बायो-इकॉनमी ₹691 अरब डॉलर पार! जानें कैसे?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Niti Aayog का बड़ा ऐलान: 2035 तक भारत की बायो-इकॉनमी ₹691 अरब डॉलर पार! जानें कैसे?

Niti Aayog ने भारत के बायो-इकॉनमी को **2035** तक **$691 अरब डॉलर** तक ले जाने के लिए एक बड़ा प्लान लॉन्च किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए छह राष्ट्रीय मिशन शुरू किए गए हैं, जिनका फोकस स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) और कृषि (Agriculture) जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और एक्सपोर्ट को बढ़ाना है। इस योजना में **₹50,000 करोड़** के एक इन्वेस्टमेंट फंड का भी प्रस्ताव है।

भारत के बायो-इकॉनमी को नई उड़ान

Niti Aayog ने देश के बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर को बदलने के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया है। इस प्लान का लक्ष्य अगले नौ सालों में देश की बायो-इकॉनमी को मौजूदा $195.3 अरब डॉलर से बढ़ाकर $691 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इस बड़ी छलांग के लिए, Aayog ने अलग-अलग विभागों के बिखरे हुए प्रोग्राम्स को छोड़कर, व्यावहारिक और कमर्शियल नतीजों पर केंद्रित छह मिशन-आधारित पहलों पर जोर देने का सुझाव दिया है।

सेक्टर ग्रोथ के लिए 6 खास मिशन

प्रस्तावित छह मिशनों में शामिल हैं: 'GeneIndia', जो जीन और सेल थेरेपी पर केंद्रित है; 'AgriBio 2.0', जिसका लक्ष्य जलवायु-प्रतिरोधी फसल विकास है; 'BioX Foundry', सिंथेटिक बायोलॉजी के कमर्शियलाइजेशन के लिए; 'One Health Grid', AI-आधारित रोग निगरानी नेटवर्क; समुद्री बायोटेक्नोलॉजी मिशन, समुद्री शैवाल की खेती के लिए; और 'BioPharmaNext', जो दवा खोज (Drug Discovery) और बायोलॉजिक्स (Biologics) में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। इन क्षेत्रों को अकादमिक रिसर्च और मार्केट-रेडी प्रोडक्ट्स के बीच की खाई को पाटने के लिए चुना गया है, जो घरेलू बायोटेक कंपनियों के लिए लंबे समय से एक चुनौती रही है।

निवेश और पॉलिसी का सपोर्ट

इस बदलाव को गति देने के लिए, रोडमैप ने एक एम्पावर्ड कमेटी (Empowered Committee) और नेशनल बायोडेटा काउंसिल (National BioData Council) का प्रस्ताव दिया है, जो इंप्लीमेंटेशन और रेगुलेटरी कोऑर्डिनेशन की निगरानी करेंगे। इसका एक अहम हिस्सा 2026 से 2035 तक चलने वाले ₹50,000 करोड़ के बायो-इकॉनमी ग्रोथ फंड (BioEconomy Growth Fund) की सिफारिश है। इस फंड का मकसद मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए जरूरी कैपिटल मुहैया कराना है। इसके अलावा, प्लान में सेक्टर के लिए विशेष प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स लाने और बेहतर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) सुरक्षा का सुझाव दिया गया है, ताकि कंपनियां हाई-वैल्यू प्रोडक्ट डेवलपमेंट की ओर बढ़ सकें।

सेक्टर का मौजूदा हाल और निवेशकों के लिए क्या है?

भारत की बायो-इकॉनमी पिछले दशक में 16 गुना बढ़ी है और वर्तमान में GDP में करीब 4.8% का योगदान देती है। निवेशकों के लिए, लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल सरकार द्वारा 15 विश्व-स्तरीय बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां बनाने के पुश में है। इस लक्ष्य की सफलता कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी, जैसे कि प्रस्तावित ग्रोथ फंड का असल में इस्तेमाल, रेगुलेटरी अप्रूवल की रफ्तार, और घरेलू कंपनियों की बायोलॉजिक्स और ड्रग डिस्कवरी में ग्लोबल लीडर्स से मुकाबला करने की क्षमता।

निवेशकों को यह देखना होगा कि सरकार इन छह मिशनों को मौजूदा फार्मा और एग्री पॉलिसीज के साथ कैसे जोड़ती है। सबसे अहम बातों में से एक बायो-इकॉनमी इन्वेस्टमेंट और पॉलिसी फोरम की स्थापना और प्रस्तावित PLI-स्टाइल इंसेंटिव्स का खास विवरण होगा। इस सेक्टर में सफलता शायद कच्चे माल और विशेष उपकरणों पर आयात निर्भरता को कम करने, और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग के पैमाने को बढ़ाने की क्षमता से मापी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.