प्रेगनेंसी के दौरान Tylenol (acetaminophen) के सेवन को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है। हालांकि इस रिसर्च में शिशु पर कुछ असर की बात कही गई है, लेकिन डॉक्टर्स और मेडिकल बॉडीज ने साफ कर दिया है कि इलाज की गाइडलाइन्स में फिलहाल कोई बदलाव नहीं है।
हाल ही में 'Human Reproduction Open' जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी ने मेडिकल जगत में चर्चा तेज कर दी है। इस रिसर्च में 302 शिशुओं का डेटा लिया गया, जिसमें पाया गया कि प्रेगनेंसी के दौरान एसिटामिनोफेन (Tylenol) के संपर्क में आने वाली शिशु लड़कियों के अंडाशय के साइज और फॉलिकल्स की संख्या में कुछ अंतर हो सकता है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
रिसर्चर्स का साफ कहना है कि यह स्टडी 'कॉज-एंड-इफेक्ट' यानी किसी सीधे कारण की पुष्टि नहीं करती है। इसका भविष्य में फर्टिलिटी या मेनोपॉज पर क्या असर पड़ेगा, इसके कोई प्रमाण नहीं हैं। अमेरिकी कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट जैसी दिग्गज संस्थाएं अभी भी प्रेगनेंसी में बुखार और दर्द के लिए एसिटामिनोफेन को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मानती हैं। एक्सपर्ट्स का तर्क है कि मां को बुखार या दर्द में छोड़ने के जोखिम दवा लेने के जोखिम से कहीं ज्यादा हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर एक 'वॉचलिस्ट' इवेंट है। Tylenol ब्रांड की मालिक कंपनी Kenvue पहले से ही अमेरिका में MDL No. 3043 जैसी कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रही है, जहां दवा पर ऑटिज्म और ADHD जैसे न्यूरोलॉजिकल विकारों से जुड़ने के आरोप लगाए गए हैं।
भले ही मौजूदा क्लीनिकल गाइडलाइन्स स्थिर हैं, लेकिन लगातार बढ़ती वैज्ञानिक रिसर्च और कानूनी दबाव फार्मा कंपनियों के लिए लंबे समय में 'रेपुटेशनल रिस्क' पैदा कर सकते हैं। हालांकि पहले भी अदालतों में इन दावों को लेकर कंपनियों के पक्ष में फैसले आए हैं, लेकिन मार्केट नजर रखने वालों को अब ऑफिशियल हेल्थ एजेंसियों के बयानों और कोर्ट की कार्यवाही पर पैनी नजर रखनी चाहिए क्योंकि इनका असर सीधे कंपनी की लायबिलिटी और शेयर सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।
