सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) एम्बुलेंस नेटवर्क के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब देरी और खराब उपकरणों पर भारी जुर्माना लगेगा। ऑपरेटरों को तय समय सीमा का पालन करना होगा, वरना ₹25,000 तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। साथ ही, पुराने वाहनों को हटाने की भी तैयारी है। इस बदलाव के तहत इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस को बढ़ावा देने के लिए ₹500 करोड़ का इंसेंटिव भी दिया जाएगा, जिसका मकसद सेवाओं में सुधार लाना है।
Detailed Coverage
जवाबदेही और जुर्माने का नया ढांचा
स्वास्थ्य मंत्रालय ने NHM एम्बुलेंस सेवा के संचालन के लिए एक नया और सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। यह नियम देश भर में चल रही 28,472 एम्बुलेंस को प्रभावित करेंगे, जो ₹39,390 करोड़ की NHM स्कीम के तहत काम कर रही हैं। इन नए दिशानिर्देशों का मकसद सेवाओं में लगातार हो रही देरी, पुराने वाहनों का इस्तेमाल और मेडिकल उपकरणों की कमी जैसी समस्याओं को दूर करना है।
नई पॉलिसी के तहत, ऑपरेटरों को तय समय-सीमा के बाद हर मिनट की देरी के लिए ₹20 का जुर्माना देना होगा। यदि वाहन तय न्यूनतम दूरी तय नहीं करते हैं - मैदानी इलाकों में 120 किमी और पहाड़ी इलाकों में 80 किमी - तो प्रति किलोमीटर ₹20 से ₹25 तक का दैनिक जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, मेडिकल उपकरण न होने या एयर कंडीशनिंग ठीक से काम न करने पर प्रति वाहन ₹5,000 का दैनिक जुर्माना और GPS कनेक्टिविटी में छेड़छाड़ या रखरखाव न करने पर ₹25,000 का भारी जुर्माना भी शामिल है। ये कदम उन पुराने तरीकों को रोकने के लिए उठाए गए हैं जहाँ ऑपरेटर खराब GPS या रिपोर्टिंग के जरिए प्रदर्शन की निगरानी से बच जाते थे।
परिचालन और बेड़े के लिए नए मानक
जवाबदेही के साथ-साथ, सरकार ने मानव संसाधन और रखरखाव के लिए भी स्पष्ट मानक तय किए हैं। अब ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल योग्य इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन और प्रशिक्षित ड्राइवर ही तैनात किए जाएं। ऐसा न करने पर ₹10,000 का जुर्माना लगेगा। हर एम्बुलेंस को महीने में कम से कम 28.5 दिन, यानी 95% की न्यूनतम परिचालन उपलब्धता बनाए रखनी होगी। पारदर्शिता और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए, पूरे बेड़े का 112 इमरजेंसी हेल्पलाइन के साथ रियल-टाइम डेटा इंटीग्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
आधुनिकीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़त
इस नए फ्रेमवर्क के तहत एम्बुलेंस बेड़े के आधुनिकीकरण को भी गति दी जाएगी। 15 साल की सेवा पूरी कर चुके सरकारी और सार्वजनिक-वित्त पोषित वाहनों को अब स्क्रैप (कबाड़) करना अनिवार्य होगा। इस बदलाव को सुविधाजनक बनाने के लिए, PM E-DRIVE स्कीम के तहत ₹500 करोड़ का इंसेंटिव दिया जाएगा, जिसका लक्ष्य 3,800 इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस को तैनात करना है। इन कदमों से सरकार पुराने और ज्यादा रखरखाव वाले वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की उम्मीद कर रही है। निवेशकों और हितधारकों को अनुबंध नवीनीकरण की गति और वर्तमान ऑपरेटरों की इन सख्त अनुपालन मानकों को पूरा करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये कारक भविष्य की परिचालन लागतों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निविदा भागीदारी को प्रभावित करेंगे।
