कंसोलिडेटेड मजबूती के बीच स्टैंडअलोन में गिरावट, ₹371.89M फाइनेंस कॉस्ट का असर
Nephrocare Health Services Limited, जिसने हाल ही में 17 दिसंबर 2025 को BSE और NSE पर लिस्टिंग के बाद अपने पहले वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए मिली-जुली तस्वीर पेश की है।
नतीजों की गहराई
स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस (Standalone Performance) पर नजर डालें तो, दिसंबर 2025 को खत्म हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 16.25% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,606.64 मिलियन पर पहुंच गया। इस दौरान, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में मामूली 4.15% की बढ़ोतरी के साथ ₹84.52 मिलियन दर्ज किया गया। हालांकि, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) 10% घटकर ₹0.90 रहा।
नौ महीनों (9M FY26) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले साल की समान अवधि में ₹285.64 मिलियन का मुनाफा कमाने वाली कंपनी का स्टैंडअलोन PAT इस बार सीधे -₹189.48 मिलियन के घाटे में चला गया। 9M FY26 के लिए बेसिक EPS -₹2.17 रहा, जबकि पिछले साल यह ₹3.53 था।
इसके विपरीत, कंसोलिडेटेड नतीजों (Consolidated Performance) में कंपनी ने दमदार प्रदर्शन दिखाया है। Q3 FY26 में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 31.68% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹2,597.29 मिलियन पर पहुंच गया। कंसोलिडेटेड PAT में 60.33% का शानदार उछाल आया और यह ₹322.40 मिलियन दर्ज हुआ। कंसोलिडेटेड बेसिक EPS में 38.87% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹3.43 रहा।
नौ महीनों (9M FY26) की अवधि में भी कंसोलिडेटेड PAT में 10.04% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹464.70 मिलियन रहा। कंसोलिडेटेड बेसिक EPS ₹5.32 दर्ज किया गया।
क्या है स्टैंडअलोन घाटे की वजह?
स्टैंडअलोन 9M FY26 के नतीजों में PAT के निगेटिव जाने का मुख्य कारण ₹371.89 मिलियन का एक बड़ा नॉन-कैश, नॉन-रिकरिंग फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) है। यह लागत उन वित्तीय देनदारियों (Financial Liabilities) से जुड़ी है, जिनका वैल्यूएशन प्रॉफिट या लॉस पर फेयर वैल्यू के जरिए किया जाता है (FVTPL)। इसी एकमुश्त लागत ने स्टैंडअलोन नौ महीने के PAT को पूरी तरह से लाल निशान में धकेल दिया।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
IPO के बाद यह पहला वित्तीय डिस्क्लोजर है, और निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि कंसोलिडेटेड और स्टैंडअलोन नतीजों में इतना बड़ा अंतर क्यों है। स्टैंडअलोन PAT में ₹371.89 मिलियन के FVTPL फाइनेंस कॉस्ट के चलते आया निगेटिव फिगर, कंपनी की स्टैंडअलोन प्रॉफिटेबिलिटी की स्थिरता पर चिंता पैदा करता है। भले ही इस लागत को नॉन-रिकरिंग बताया गया हो, लेकिन कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के आउटलुक पर स्पष्टता की कमी निवेशकों को और जानकारी के लिए उत्सुक रखेगी। गवर्नेंस के मोर्चे पर, कंपनी ने मिस्टर रवींद्र तिवारी को सीनियर मैनेजमेंट पर्सोनल (Senior Management Personnel) के तौर पर नियुक्त करने की भी जानकारी दी है।