Natco Pharma के शेयर में आज **5%** की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी किए, जिसमें मुनाफा **57%** घटकर **₹206.5 करोड़** रह गया। रेवेन्यू में भी **45%** की भारी गिरावट आई, जिसकी मुख्य वजह कैंसर की दवा Lenalidomide की बिक्री में कमी है। हालांकि, कंपनी ने अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) का ऐलान किया है, लेकिन **₹2,000 करोड़** जुटाने की योजना से इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) का खतरा भी मंडरा रहा है।
Natco Pharma के शेयरों में शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को 5% की बड़ी गिरावट देखी गई। कंपनी ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए, जिसके बाद यह गिरावट आई। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 57% गिरकर ₹206.5 करोड़ पर आ गया। वहीं, ऑपरेशन्स से रेवेन्यू (Revenue from operations) में भी 44.7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹735.2 करोड़ रहा।
प्रोडक्ट कंसंट्रेशन का असर
इस कमजोर प्रदर्शन का मुख्य कारण जेनेरिक कैंसर दवा Lenalidomide की बिक्री में आई भारी कमी रही। Natco Pharma ऐतिहासिक रूप से अपनी कमाई के एक बड़े हिस्से के लिए इस खास दवा पर निर्भर रही है। जब इस तरह के हाई-वैल्यू प्रोडक्ट की बिक्री में उतार-चढ़ाव आता है, तो इसका सीधा असर कंपनी के बॉटम लाइन और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है। कंपनी ने बताया कि इस तिमाही में उसके डोमेस्टिक फॉर्मूलेशन (Domestic Formulations) और API बिजनेस में ग्रोथ देखी गई, लेकिन यह उसके एक्सपोर्ट प्रोडक्ट से कम रेवेन्यू की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं था।
प्रॉफिटेबिलिटी और ऑपरेशनल दबाव
कम बिक्री का असर कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) पर भी साफ दिखा। Natco Pharma ने इस तिमाही के लिए ₹186 करोड़ का EBITDA (ऑपरेटिंग प्रॉफिट का एक पैमाना) दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 67.4% कम है। नतीजतन, ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 25.3% रह गया। निवेशकों के लिए, यह मार्जिन प्रेशर प्रोडक्ट कंसंट्रेशन से जुड़े जोखिमों को उजागर करता है, जहां कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस कुछ चुनिंदा दवाओं के लाइफसाइकिल और डिमांड पर बहुत अधिक निर्भर हो जाता है।
फंड जुटाने की योजना और डिविडेंड
तिमाही नतीजों के अलावा, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹2,000 करोड़ तक फंड जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। कंपनी Qualified Institutional Placements (QIP) या अन्य इंस्ट्रूमेंट्स सहित विभिन्न विकल्पों पर विचार करेगी। अगर कंपनी नए इक्विटी शेयर जारी करके यह कैपिटल जुटाती है, तो इससे मौजूदा शेयरधारकों का इक्विटी डाइल्यूशन हो सकता है, जिसका मतलब है कि कंपनी में उनके मालिकाना हक का प्रतिशत कम हो सकता है। कमजोर तिमाही प्रदर्शन के साथ मिलकर यह एक चिंता का विषय बना हुआ है।
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹1.50 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 20 अगस्त 2026 तय की गई है, और पेमेंट 26 अगस्त 2026 से शुरू होने वाली है।
आगे चलकर, निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी विशिष्ट दवाओं पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपने प्रोडक्ट मिक्स का प्रबंधन कैसे करती है। इसके अलावा, बाजार प्रस्तावित फंड जुटाने के विवरणों और कंपनी की फंड्स के उपयोग की योजना पर बारीकी से नजर रखेगा, क्योंकि इसका कंपनी की बैलेंस शीट और ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
