Natco Pharma को मिली जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' की मंजूरी, पर 'पेटेंट जंग' से शेयर पर दबाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Natco Pharma को मिली जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' की मंजूरी, पर 'पेटेंट जंग' से शेयर पर दबाव
Overview

हैदराबाद की Natco Pharma को भारत में जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' इंजेक्शन बनाने और बेचने के लिए CDSCO से मंजूरी मिल गई है। कंपनी मार्च 2026 में इस दवा को लॉन्च करने की योजना बना रही है। हालांकि, इस दवा के बाजार में आने से पहले ही कंपनी को डेनिश फार्मा दिग्गज Novo Nordisk के साथ चल रही पेटेंट लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है। इस कानूनी अनिश्चितता के कारण शुक्रवार को Natco Pharma के शेयर में गिरावट दर्ज की गई।

क्या है पूरा मामला?

Natco Pharma को मिला यह नियामक अप्रूवल (Regulatory Approval) भारतीय डायबिटीज (Diabetes) और मोटापे (Obesity) के बढ़ते बाजार में कंपनी के लिए एक बड़ा कदम है। लेकिन, यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब पेटेंट की समय-सीमा नजदीक आ रही है और कानूनी जांच तेज हो गई है। ऐसे में, कंपनी का बाजार में प्रवेश एक 'हाई-स्टेक गैंबल' (High-stakes gambit) है, जो अदालती फैसलों पर निर्भर करेगा।

पेटेंट का पचड़ा: 'एवरग्रीनिंग' पर सवाल

Natco Pharma का जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' के साथ बाजार में उतरने का रास्ता सीधे तौर पर पेटेंट मुकदमेबाजी से जुड़ा हुआ है। कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में डेनिश दवा निर्माता Novo Nordisk के भारतीय पेटेंट (IN 262697) को रद्द करने के लिए एक याचिका दायर की है। यह पेटेंट मार्च 2026 में समाप्त हो रहा है। इसी तरह की चुनौती Dr. Reddy's Laboratories ने भी पिछले साल दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि Novo Nordisk के पेटेंट 'एवरग्रीनिंग' (Evergreening) के दायरे में आ सकते हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही Dr. Reddy's Laboratories और Sun Pharmaceutical Industries द्वारा Novo Nordisk के पेटेंट को चुनौती देने वाली याचिकाओं को विश्वसनीय माना है। कोर्ट ने इन कंपनियों को पेटेंट समाप्त होने तक घरेलू बिक्री पर रोक के साथ 'सेमाग्लूटाइड' का निर्माण और गैर-पेटेंट वाले देशों में निर्यात करने की अनुमति दी है। कोर्ट के शुरुआती निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि Novo Nordisk का फॉर्मूलेशन पेटेंट कमजोर हो सकता है। Natco Pharma की कानूनी रणनीति इसी पेटेंट को रद्द करवाने पर टिकी है, जिससे घरेलू बाजार में उसके लॉन्च का रास्ता साफ हो सके।

नियामक मंजूरी और बाजार में एंट्री की तैयारी

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से मिली मंजूरी के तहत Natco Pharma को भारत में जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' इंजेक्शन का उत्पादन और विपणन करने का लाइसेंस मिल गया है। 'सेमाग्लूटाइड' टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) वाले वयस्कों के लिए, जो उचित आहार और व्यायाम से नियंत्रित नहीं हो पा रहा है, एक सहायक उपचार के रूप में इस्तेमाल की जाती है। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2026 में उत्पाद को भारतीय बाजार में लॉन्च करना है, जो प्रमुख पेटेंट की अपेक्षित समाप्ति तिथि के अनुरूप है। यह मंजूरी Natco Pharma को तेजी से बढ़ रहे थेरेपी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करती है, बशर्ते चल रहे पेटेंट विवादों का समाधान अनुकूल रहे।

कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और मार्केट के हालात

भारतीय फार्मा सेक्टर जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' के बड़े इनफ्लो के लिए तैयार हो रहा है। Sun Pharmaceutical Industries, Zydus Lifesciences और Alkem Laboratories जैसी कंपनियों ने भी जेनेरिक 'सेमाग्लूटाइड' के लिए अप्रूवल हासिल कर लिया है। Dr. Reddy's Laboratories ने पेटेंट समाप्त होने के बाद सालाना लाखों 'सेमाग्लूटाइड' पेन लॉन्च करने की योजना बताई है।

वजन घटाने वाली दवाओं (Weight-loss drugs) का ग्लोबल मार्केट इस दशक के अंत तक $150 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 'सेमाग्लूटाइड' जैसे GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 Receptor Agonists) सबसे आगे हैं। भारत में, एंटी-ओबेसिटी ड्रग मार्केट (Anti-obesity drug market) मार्च 2025 तक पांच साल में चार गुना बढ़कर ₹576 करोड़ हो गया है, जिसका मुख्य कारण GLP-1 दवाएं हैं, जो बाजार के मूल्य का 75% हिस्सा रखती हैं। भारतीय 'सेमाग्लूटाइड' मार्केट ने 2024 में $25.8 मिलियन का राजस्व उत्पन्न किया और 2035 तक 17.8% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ $347.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। Novo Nordisk की 'सेमाग्लूटाइड' फ्रेंचाइजी ने 2025 में अनुमानित $33 बिलियन और 2026 के लिए $36 बिलियन का राजस्व दर्ज किया, जो इसकी वैश्विक स्थिति को दर्शाता है। कंपनी के Ozempic और Wegovy ने 2023 में अपने डायबिटीज और ओबेसिटी केयर सेगमेंट के लिए DKK 215 बिलियन का राजस्व अर्जित किया था।

कंपनी का प्रदर्शन और शेयर की चाल

Natco Pharma का शेयर शुक्रवार को 2.13% की गिरावट के साथ ₹822 पर बंद हुआ, जिससे साल-दर-तारीख (YTD) इसमें 8% की कमी आई है। कंपनी की मार्केट कैप लगभग ₹14,700 करोड़ है। पिछले बारह महीनों (TTM) का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 9.5x है, जो इसके वैल्यू-ओरिएंटेड पोजिशनिंग का संकेत देता है। एनालिस्टों ने Natco Pharma के लिए 'न्यूट्रल' (Neutral) कंसेंसस रेटिंग बनाए रखी है, जिसमें 12 महीने का औसत प्राइस टारगेट ₹970.36 है, जो 15% से अधिक की संभावित अपसाइड का सुझाव देता है।

कानूनी दांव-पेंच का 'बीयर केस' (Bear Case)

Natco Pharma के लिए सबसे बड़ा जोखिम अनसुलझे पेटेंट मुकदमेबाजी (Patent Litigation) में है। हालांकि नियामक मंजूरी मिल गई है, लेकिन भारत में 'सेमाग्लूटाइड' लॉन्च करने और बेचने की क्षमता दिल्ली हाई कोर्ट के Novo Nordisk के पेटेंट की वैधता पर आने वाले फैसले पर निर्भर करती है। किसी भी तरह की देरी या प्रतिकूल फैसला Natco की बाजार के अवसर का लाभ उठाने की क्षमता को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है, खासकर जब Dr. Reddy's और Sun Pharma जैसी अन्य भारतीय फर्मों ने पहले ही निर्यात के लिए न्यायिक अनुमति प्राप्त कर ली है। Novo Nordisk ने Alkem Laboratories और Zydus Lifesciences के खिलाफ पेटेंट उल्लंघन के मुकदमे भी दायर किए हैं। कंपनी का पेटेंट मुकदमेबाजी निपटान का इतिहास, जैसे कि अक्टूबर 2024 में अमेरिका में जेनेरिक Ozempic को लेकर हुआ समझौता, इन कानूनी चुनौतियों से निपटने के उसके रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। हालांकि, घरेलू लॉन्च पूरी तरह से भारत में Novo Nordisk के पेटेंट दावों को नकारने पर निर्भर करता है।

एनालिस्टों का नजरिया

Natco Pharma की रणनीतिक मंजूरी के बावजूद, एनालिस्टों का सेंटिमेंट सतर्क 'न्यूट्रल' बना हुआ है। औसत एनालिस्ट प्राइस टारगेट ₹970.36 अपेक्षित अपसाइड का संकेत देता है, लेकिन चल रही कानूनी जटिलताएं अनिश्चितता की एक महत्वपूर्ण परत जोड़ती हैं। बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया, यानी शेयर में गिरावट, यह बताती है कि निवेशक निकट अवधि की नियामक जीत की तुलना में पेटेंट विवादों के समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं, यह मानते हुए कि बाजार तक पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सीधे कानूनी नतीजों से जुड़ी हुई है।

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