बोर्ड ने दी स्कीम को मंजूरी, अब शेयरहोल्डर की बारी
Narayana Hrudayalaya Limited (NHL) ने दिसंबर 2025 में अपने बोर्ड की मंजूरी के बाद अब एक महत्वपूर्ण 'स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' (Scheme of Arrangement) को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। इसके तहत, कंपनी अपनी पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी NH Integrated Care Private Limited (NHIC) के 'क्लिनिकल सर्विसेज़ अंडरटेकिंग' (clinical services undertaking) को वापस पैरेंट कंपनी में डीमर्ज करने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव पर शेयरधारकों और लेनदारों (creditors) की मंजूरी पाने के लिए 2 अप्रैल 2026 को अलग-अलग बैठकें बुलाई गई हैं।
डीमर्जर का मकसद: फोकस और ग्रोथ
इस कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (corporate restructuring) का मुख्य उद्देश्य कंपनी के बिजनेस ऑपरेशन्स को और अधिक फोकस करना है। इस कदम से NHIC पूरी तरह से अपने 'नारायण आरोग्यम' (Narayana Aarogyam) प्रिवेंटिव हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म (preventive healthcare platform) पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। वहीं, पैरेंट कंपनी यानी Narayana Hrudayalaya क्लिनिकल सर्विसेज़ को संभालेगी। माना जा रहा है कि इससे अलग-अलग बिजनेस मॉडल्स को विकसित करने और वैल्यूएशन (valuation) को बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, रिसोर्स एफिशिएंसी (resource efficiency) को ऑप्टिमाइज़ (optimize) करने और एडमिनिस्ट्रेटिव फंक्शन्स (administrative functions) को कंसॉलिडेट (consolidate) करने की उम्मीद है।
डीटेल में समझें स्कीम
NHIC, Narayana Hrudayalaya Limited की एक व्होली-ओन्ड सब्सिडियरी (wholly-owned subsidiary) है, जिसकी शुरुआत 10 जनवरी 2023 को हुई थी। इस डीमर्ज किए जाने वाले क्लिनिकल सर्विसेज़ अंडरटेकिंग में बेंगलुरु के 10 क्लिनिक्स शामिल हैं। फाइनेंशियल ईयर (FY) 25 में इन क्लिनिक्स का टर्नओवर (turnover) ₹39.94 करोड़ रहा, जो Narayana Hrudayalaya के कुल स्टैंडअलोन टर्नओवर का लगभग 1.11% था।
शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों (OAVM) से आयोजित की जाएंगी। शेयरहोल्डर ई-वोटिंग (e-voting) के लिए कट-ऑफ डेट 27 मार्च 2026 है, जबकि क्रेडिटर्स के लिए ई-वोटिंग कट-ऑफ डेट 31 अक्टूबर 2025 रखी गई है। ई-वोटिंग का पूरा पीरियड 30 मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 तक रहेगा।
आगे क्या?
इस डीमर्जर से शेयरहोल्डिंग पैटर्न में तत्काल कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है, क्योंकि NHIC पहले से ही 100% सब्सिडियरी है। लेकिन, यह स्कीम कंपनी के ऑपरेशनल स्ट्रक्चर को सरल बनाने में मदद करेगी।
मुख्य जोखिम (Risks): सबसे बड़ा जोखिम शेयरधारकों और लेनदारों से मंजूरी मिलना है। इसके अलावा, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) जैसी रेगुलेटरी अथॉरिटीज (regulatory authorities) से मंजूरी मिलना भी महत्वपूर्ण होगा। डीमर्ज की गई सर्विसेज़ का पैरेंट कंपनी में सफलतापूर्वक एकीकरण (integration) भी एक बड़ी चुनौती होगी।
फाइनेंशियल स्थिति: Narayana Hrudayalaya का Q3 FY25 स्टैंडअलोन रेवेन्यू (revenue) ₹1366.68 करोड़ और नेट प्रॉफिट (net profit) ₹192.94 करोड़ रहा।
आगे क्या ट्रैक करें: 2 अप्रैल 2026 को होने वाली बैठकों के नतीजे, नियामकों से मिलने वाली मंजूरी और डीमर्जर के बाद प्रबंधन (management) द्वारा बताए जाने वाले अपेक्षित लाभ और एकीकरण की टाइमलाइन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।