NPPA ने 9 नवंबर से 543 जेनेरिक कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को **30%** पर सीमित करने का आदेश दिया है। मरीजों के लिए राहत की इस खबर का फार्मा कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर हो सकता है।
फार्मा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
NPPA का यह फैसला उन भारतीय दवा कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है जिनका ऑन्कोलॉजी (Oncology) पोर्टफोलियो बड़ा है। इसमें Sun Pharma, Cipla, Dr. Reddy’s Laboratories और Natco Pharma जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। जब रेगुलेटर ट्रेड मार्जिन को 30% पर कैप कर देते हैं, तो फार्मा कंपनियों को अपना MRP घटाना पड़ता है ताकि डिस्ट्रिब्यूटर और हॉस्पिटल का मार्जिन तय सीमा में रहे। अगर कंपनियां वॉल्यूम बढ़ाकर इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाईं, तो उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ना तय है।
जेनेरिक बनाम पेटेंट दवाएं
यह समझना जरूरी है कि यह नियम केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू है। महंगी और पेटेंट वाली दवाओं जैसे Merck की Keytruda, Bristol Myers Squibb की Opdyta, और AstraZeneca की Tagrisso और Imjudo को इस दायरे से बाहर रखा गया है। यानी विदेशी कंपनियों की इन महंगी दवाओं की प्रीमियम प्राइसिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिससे बाजार में एक दोहरी स्थिति बन गई है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राइवेट हेल्थकेयर में ट्रेड मार्जिन की समीक्षा के बाद उठाया गया है। कोर्ट ने कैंसर के इलाज की बढ़ती लागत पर चिंता जताई थी, जिसके बाद सरकार ने पूरी सप्लाई चेन पर शिकंजा कस दिया है। निवेशकों के लिए अब नजरें इस पर होंगी कि कंपनियां अपनी अगली तिमाही के नतीजों में इस मार्जिन कटौती के असर को कैसे मैनेज करती हैं और क्या सरकार आने वाले समय में पेटेंट दवाओं को भी अपने दायरे में लेगी या नहीं।
