National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने कैंसर की 137 नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को सीमित कर दिया है, जिससे औसत कीमतों में **38%** तक की कमी आई है। हालांकि, **159** महंगी पेटेंटेड दवाएं इस दायरे से बाहर हैं और उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ट्रेड मार्जिन पर लगाम
9 नवंबर से लागू होने वाले इस नए रेगुलेशन का मुख्य उद्देश्य दवाओं की सप्लाई चेन में होने वाली भारी मुनाफाखोरी को रोकना है। सरकार ने इन दवाओं पर कुल ट्रेड मार्जिन को MRP का 30% तय किया है। इसका मतलब है कि मैन्युफैक्चरर और रिटेलर के बीच का मार्जिन अब एक तय दायरे में रहेगा, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह मार्जिन मैन्युफैक्चरर प्राइस पर लगभग 42.86% का मार्कअप देता है, जो अभी भी काफी अधिक है।
महंगे इलाज पर नहीं हुआ असर
इस फैसले की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि Keytruda, Tagrisso, Alecensa, Voranigo और Koselugo जैसी लाइफ-सेविंग पेटेंटेड दवाएं इस नियम से बाहर हैं। ये दवाएं प्रति इंजेक्शन या ट्रीटमेंट साइकिल लाखों रुपये की हैं, और इनके दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं। चूँकि ये दवाएं पेटेंटेड और इंपोर्टेड हैं, इसलिए सरकार फिलहाल इन पर अधिक सख्ती बरतने से बच रही है।
जानकारों की चिंता
केसी जैन (KC Jain) जैसे जानकारों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि एसेंशियल मेडिसिन्स (DPCO के तहत) पर रिटेलर मार्जिन सिर्फ 16% है, जबकि इन कैंसर दवाओं पर 30% का मार्जिन अभी भी काफी उदार है।
निवेशकों के लिए संकेत
शेयर बाजार और फार्मा सेक्टर के लिए यह एक मिला-जुला संकेत है। जो कंपनियां जेनेरिक ऑन्कोलॉजी (Cancer) दवाओं पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, पेटेंटेड दवाएं बेचने वाली कंपनियों को फिलहाल राहत है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि 9 नवंबर के बाद ग्राउंड लेवल पर यह नियम कितनी सख्ती से लागू होता है और क्या भविष्य में NPPA प्रीमियम दवाओं को भी इस रेगुलेशन के दायरे में लाता है या नहीं।
