भारत सरकार ने ऑर्गन डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। 'जुग जुग जियो अभियान' के तहत, अब आधार (Aadhaar) की मदद से ऑर्गन डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। इस कदम का मकसद ऑर्गन की भारी कमी को पूरा करना है, जहां मृत व्यक्तियों से ऑर्गन डोनेशन ट्रांसप्लांट का सिर्फ **18%** है।
आधार से जुड़ेगा ऑर्गन डोनेशन का रिकॉर्ड
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी 'जुग जुग जियो अभियान' की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य ऑर्गन डोनर रजिस्ट्रेशन को बढ़ाना है। अब राष्ट्रीय ऑर्गन डोनेशन पोर्टल पर आधार ऑथेंटिकेशन को जोड़ा गया है। सरकार का इरादा है कि इससे एक सुरक्षित और वेरिफाइड डोनर डेटाबेस तैयार होगा। इस पहल से नागरिकों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और डिजिटल पहचान के जरिए डोनर के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।
गांवों तक पहुंचेगी सरकारी मदद
सरकार ग्रामीण और छोटे शहरों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centers) और ग्राम पंचायतों का इस्तेमाल कर रही है। ऑर्गन डोनेशन रजिस्ट्री को राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ डेटाबेस से जोड़कर, मंत्रालय प्रशासनिक बाधाओं को कम करना चाहता है। सितंबर 2023 तक, नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) पोर्टल पर 5,59,000 से ज़्यादा आधार-वेरिफाइड डोनर प्लेज दर्ज हो चुके थे। आधार के इस्तेमाल से पहचान की धोखाधड़ी रुकेगी और डोनर की सहमति का एक स्पष्ट, छेड़छाड़-रोधी रिकॉर्ड मिलेगा।
ट्रांसप्लांट की कमी को दूर करने की कोशिश
भारत में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए ऑर्गन की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मार्च तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय वेटिंग लिस्ट में लगभग 90,000 मरीज थे। जीवित डोनर्स पर निर्भरता बहुत ज़्यादा है, 2025 में हुए 20,019 ट्रांसप्लांट में से 80% से ज़्यादा जीवित व्यक्तियों से हुए थे। वहीं, ब्रेन-डेड मरीजों से ऑर्गन मिलने की अपार संभावनाओं के बावजूद, मृत डोनर की दर प्रति मिलियन आबादी पर 1 से भी कम है।
नियमों का पालन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम में कई ऑपरेशनल दिक्कतें भी आ रही हैं। 2025 में, 804 रजिस्टर्ड ट्रांसप्लांट अस्पतालों में से 217 ने राष्ट्रीय रजिस्ट्री को अपना ट्रांसप्लांट डेटा रिपोर्ट नहीं किया, जिससे ऑर्गन आवंटन को ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। इसे देखते हुए, NOTTO ने अस्पतालों और राज्य के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि 'ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट, 1994' का पालन सुनिश्चित हो सके। इन निर्देशों में डोनर और मरीज की काउंसलिंग में सुधार और कानूनी विवादों व प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना शामिल है।
प्रक्रिया में सुधार के साथ-साथ, केंद्र सरकार नए राज्य-स्तरीय ट्रांसप्लांट सेंटर और टिश्यू बैंक स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता भी दे रही है। जिन क्षेत्रों में ट्रांसप्लांट की सुविधा कम है, वहां ऑर्गन मिलने की दर को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल कोऑर्डिनेटरों को ट्रेनिंग देना एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र है। हेल्थकेयर सेक्टर में निवेशकों और हितधारकों के लिए, अस्पतालों द्वारा डेटा रिपोर्टिंग में सुधार, मृत डोनर रजिस्ट्रेशन में वृद्धि और क्षेत्रीय ट्रांसप्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए सरकारी ग्रांट का प्रभावी उपयोग मुख्य बातें होंगी।
