National Medical Commission (NMC) ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए कड़े विज्ञापन नियम लागू कर दिए हैं। अब **6 अक्टूबर, 2026** से अस्पताल और डॉक्टर AI-जनरेटेड फर्जी फीडबैक या पैड SEO का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
National Medical Commission (NMC) ने चिकित्सा जगत में विज्ञापन और डिजिटल प्रचार को लेकर एक नया और सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसका सीधा असर अस्पतालों और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की डिजिटल मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर पड़ेगा।
AI और फर्जी प्रचार पर लगाम
नियमों के अनुसार, अब कोई भी डॉक्टर या अस्पताल आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर फर्जी मरीज अनुभव या सिंथेटिक आवाजें नहीं बना पाएगा। इसके साथ ही, सर्च इंजन रैंकिंग को हेरफेर (manipulate) करने के लिए पैसे देकर SEO कराना भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। रेगुलेटर का मानना है कि ये तरीके मरीजों के भरोसे को तोड़ते हैं और प्रतिस्पर्धा को अनुचित बनाते हैं।
मार्केटिंग के पुराने तरीके पड़ सकते हैं भारी
अस्पताल अब खुद को 'नंबर वन' या 'बेस्ट' कहने वाले विज्ञापनों का इस्तेमाल तब तक नहीं कर पाएंगे जब तक उनके पास डेटा का ठोस प्रमाण न हो। साथ ही, मरीजों को लुभाने के लिए दिए जाने वाले डिस्काउंट कूपन, गिफ्ट पैक्स और रेफरल बोनस पर भी रोक लगा दी गई है।
अनुपालन (Compliance) और निवेशकों के लिए जोखिम
जो कंपनियां आक्रामक डिजिटल मार्केटिंग पर निर्भर हैं, उनके लिए अब ऑपरेशनल दबाव बढ़ना तय है। इन नए मानकों के चलते कंपनियों की मार्केटिंग लागत बढ़ सकती है। रेगुलेटर ने इसके लिए सजा का भी प्रावधान रखा है:
- शुरुआती उल्लंघन: औपचारिक चेतावनी और एथिक्स ट्रेनिंग।
- बार-बार गलती करने पर: पब्लिक सेंसर (Public Censure) और भारी जुर्माना।
- गंभीर उल्लंघन: 3 महीने से 1 साल तक का मेडिकल लाइसेंस सस्पेंशन।
- लगातार नॉन-कम्प्लायंस: मेडिकल रजिस्टर से 3 साल तक के लिए नाम हटाया जा सकता है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि प्रमुख हॉस्पिटल चेन और डायग्नोस्टिक नेटवर्क अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को कितनी जल्दी बदलते हैं, ताकि किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
