भारत में मेडिकल की पढ़ाई अब और आसान हो जाएगी! 2026-27 के लिए रिकॉर्ड **1,36,939** MBBS सीटें मंजूर की गई हैं, जिसमें **9,911** नई सीटें जोड़ी गई हैं। नियमों में ढील के चलते कॉलेज तेज़ी से अपनी क्षमता बढ़ा पा रहे हैं। खास बात ये है कि नई सीटों में से लगभग **79%** प्राइवेट संस्थानों को मिली हैं।
NMC ने मेडिकल सीटों में किया ज़बरदस्त इज़ाफ़ा
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का बड़ा ऐलान किया है। 2026-27 के सेशन के लिए अब कुल 1,36,939 MBBS सीटें उपलब्ध होंगी। यह इज़ाफ़ा 9,911 नई सीटों के जुड़ने से संभव हुआ है। भारत में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लक्ष्य के तहत यह कदम उठाया गया है, जिससे अब हर 811 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध होगा, जो कि 1:1,000 के वैश्विक मानक से बेहतर है।
नए नियमों से बढ़ी कॉलेजों की क्षमता
सीटों की इस बढ़ोतरी के पीछे Graduate Medical Education Regulations 2023 का बड़ा हाथ है। पहले मेडिकल कॉलेजों को नई सीटें जोड़ने के लिए तब तक इंतज़ार करना पड़ता था जब तक उनके पहले बैच के छात्र पूरा कोर्स न कर लें। लेकिन, नए नियमों के तहत अब कॉलेज अपनी स्थापना के दूसरे साल से ही क्षमता विस्तार के लिए अप्लाई कर सकते हैं, बशर्ते वे ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी बनाए रखें। इस बदलाव से सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के मेडिकल कॉलेजों को अपनी क्षमता बढ़ाने में कम समय लगेगा।
प्राइवेट संस्थानों का दबदबा
नई मंजूर हुई 9,911 सीटों में से 2,400 सीटें 25 नए मेडिकल कॉलेज खोलने से आई हैं, जिनमें 7 सरकारी और 18 प्राइवेट क्षेत्र के हैं। बाकी 7,511 सीटें मौजूदा कॉलेजों की क्षमता बढ़ाने से मिली हैं। डेटा बताता है कि इन नई सीटों का 79% हिस्सा प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को मिला है। यह दिखाता है कि मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में प्राइवेट पैसा कितना अहम हो गया है, जिसका असर एजुकेशनल ट्रस्ट और हेल्थकेयर से जुड़ी कॉर्पोरेट संस्थाओं के रेवेन्यू मॉडल पर भी पड़ सकता है।
NMC की कड़ी निगरानी
सीटें बढ़ाने के साथ-साथ NMC ने अपनी निगरानी भी सख्त कर दी है। कमीशन ने साफ कर दिया है कि तय सीटों से ज़्यादा दाखिले करने वाले कॉलेजों पर NMC Act 2019 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। काउंसलिंग के दौरान कॉलेजों को मंजूर सीटों की संख्या का सख्ती से पालन करना होगा। आगे चलकर, निवेशकों और हितधारकों की नज़रें प्राइवेट कॉलेजों में होने वाले असल दाखिलों की संख्या और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की गति पर रहेंगी, क्योंकि यही चीज़ें शिक्षा की गुणवत्ता और इन संस्थानों की वित्तीय स्थिरता तय करेंगी।
