गोवा की कंपनी Molbio Diagnostics ने अपने IPO का प्राइस बैंड ₹768-807 प्रति शेयर तय किया है। कंपनी **₹940 करोड़** जुटाने की तैयारी में है। यह ऑफर 10 अगस्त को खुलेगा और 12 अगस्त, 2026 को बंद होगा। निवेशकों को कंपनी की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ के साथ-साथ बढ़ते कर्ज और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर निर्भरता को भी ध्यान में रखना चाहिए।
Molbio Diagnostics IPO की बड़ी बातें
गोवा की जानी-मानी मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स कंपनी Molbio Diagnostics ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने ₹768 से ₹807 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह IPO पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए 10 अगस्त को खुलेगा और 12 अगस्त, 2026 को बंद होगा। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹9,300 करोड़ है।
इस IPO के जरिए कंपनी कुल ₹939.7 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसमें ₹200 करोड़ का फ्रेश इश्यू और 91.66 लाख शेयरों का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल है, जिसकी वैल्यू ₹739.7 करोड़ है। OFS के तहत Motilal Oswal के India Business Excellence Fund, V-Sciences Investments (Temasek Holdings की सब्सिडियरी) और प्रमोटर्स अपने कुछ शेयर बेचेंगे। इन शेयरों की लिस्टिंग 17 अगस्त, 2026 को BSE और NSE पर होने की उम्मीद है।
कंपनी की ग्रोथ और बिज़नेस रिस्क
Molbio Diagnostics 'Truenat' प्लेटफॉर्म का संचालन करती है, जो एक पेटेंटेड सिस्टम है। इसका इस्तेमाल टीबी और कोविड-19 जैसी बीमारियों के लिए रैपिड, डिसेंट्रलाइज्ड PCR टेस्टिंग के लिए होता है। हालिया फाइनेंशियल ईयर (FY26) में, कंपनी ने ₹1,445.7 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 41.7% ज्यादा है। इसी अवधि में, इसका नेट प्रॉफिट ₹166.6 करोड़ रहा, जो 14.8% की ग्रोथ दिखाता है। हालाँकि, रेवेन्यू ग्रोथ की तुलना में प्रॉफिट ग्रोथ धीमी रही है।
निवेशकों के लिए कंपनी की फाइनेंसियल स्ट्रक्चर और बिजनेस मॉडल पर नजर रखना अहम होगा। कंपनी का कर्ज हालिया फाइनेंशियल पीरियड में तीन गुना बढ़ गया है, जो इसकी फाइनेंसियल फ्लेक्सिबिलिटी को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, Molbio का एक बड़ा हिस्सा सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर निर्भर करता है। सरकारी नीतियों, पब्लिक हेल्थ पहलों के फंड या प्रोक्योरमेंट साइकिल्स में बदलाव कंपनी की रेवेन्यू स्थिरता पर सीधा असर डाल सकते हैं।
फंड का इस्तेमाल और लॉजिस्टिक्स
फ्रेश इश्यू से जुटाए गए ₹200 करोड़ का इस्तेमाल कैपिटल खर्च के लिए किया जाएगा। कंपनी ₹105.5 करोड़ एक नई रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) फैसिलिटी और सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाने में लगाएगी। वहीं, ₹72.2 करोड़ गोवा और विशाखापत्तनम में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए प्लांट और मशीनरी खरीदने पर खर्च होंगे। बाकी फंड सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए रखे जाएंगे।
रिटेल निवेशकों के लिए, मिनिमम बिड साइज 18 इक्विटी शेयर है, जिसके लिए कम से कम ₹14,526 का निवेश करना होगा। कंपनी के कर्मचारियों के लिए ₹1.5 करोड़ के शेयर आरक्षित किए गए हैं, जिन्हें फाइनल ऑफर प्राइस पर ₹76 प्रति शेयर की छूट मिलेगी। जैसे-जैसे कंपनी लिस्टिंग की ओर बढ़ रही है, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार की प्रगति और ग्रोथ बनाए रखते हुए कर्ज प्रबंधन की क्षमता बाजार के लिए महत्वपूर्ण मॉनिटर योग्य बिंदु होंगे।
