Moderna के कैंसर ट्रायल की सफलता से भारतीय बायोसिमिलर कंपनियों पर फोकस

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AuthorMehul Desai|Published at:
Moderna के कैंसर ट्रायल की सफलता से भारतीय बायोसिमिलर कंपनियों पर फोकस

Moderna और Merck के पर्सनल mRNA कैंसर थेरेपी के सफल फेज-3 ट्रायल ने ऑन्कोलॉजी मार्केट में निवेशकों की रुचि फिर से जगा दी है। Merck की ब्लॉकबस्टर दवा Keytruda के इस कॉम्बिनेशन में अहम होने के कारण, Zydus Lifesciences, Biocon और Dr. Reddy's जैसी भारतीय फार्मा कंपनियां, जो इस दवा के बायोसिमिलर वर्जन विकसित कर रही हैं, चर्चा में हैं। निवेशक इन कंपनियों के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल का आंकलन कर रहे हैं।

Moderna-Merck ट्रायल के नतीजे

Moderna और Merck ने अपने फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल, INTerpath-001, के मिले-जुले नतीजे जारी किए हैं। इस ट्रायल में पर्सनल mRNA कैंसर थेरेपी (V940) को Merck की ब्लॉकबस्टर इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया गया। यह स्टडी मेलानोमा (त्वचा कैंसर) के स्टेज IIB-IV वाले मरीजों पर की गई थी, जिसमें Keytruda अकेले इस्तेमाल करने की तुलना में बीमारी के दोबारा होने की दर में काफी कमी देखी गई। इस सफलता ने mRNA टेक्नोलॉजी को स्थापित कैंसर उपचारों के साथ मिलाने की क्षमता को साबित किया है, जिससे दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान इस ओर गया है।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर असर

भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए, यह डेवलपमेंट अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि Keytruda (pembrolizumab) एक बहुत बड़ी दवा है। Keytruda दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली कैंसर दवाओं में से एक है, जिसकी 2024 में ग्लोबल बिक्री लगभग $29.5 बिलियन रही। प्रमुख बाजारों में इस दवा के पेटेंट लगभग 2027-2028 तक समाप्त होने लगेंगे, जिसके बाद कई भारतीय फार्मा कंपनियां इसके बायोसिमिलर बनाने और लॉन्च करने की दौड़ में हैं। बायोसिमिलर, असल बायोलॉजिकल दवा का एक बहुत ही समान और स्वीकृत वर्जन होता है, जो मूल दवा के पेटेंट खत्म होने के बाद कम लागत वाला विकल्प प्रदान करता है।

किन कंपनियों पर है नजर?

कई बड़ी भारतीय कंपनियों ने इस क्षेत्र में अपने काम का खुलासा किया है। Zydus Lifesciences, Formycon के साथ साझेदारी में अपने बायोसिमिलर कैंडिडेट, FYB206 पर काम कर रही है और शुरुआती स्टडी में सकारात्मक नतीजे बताए हैं। Biocon Biologics ने उच्च-मांग वाले कैंसर उपचार बाजार का फायदा उठाने के लिए Keytruda बायोसिमिलर को अपने ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो में शामिल करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, Dr. Reddy’s Laboratories ने Alvotech के साथ मिलकर इस दवा का एक वर्जन विकसित करने और व्यावसायिक बनाने के लिए एक ग्लोबल समझौता किया है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि Moderna-Merck के कॉम्बिनेशन थेरेपी की क्लिनिकल सफलता का मतलब इन भारतीय कंपनियों के लिए तत्काल रेवेन्यू नहीं है। बायोसिमिलर के लिए बाजार का अवसर केवल दवा की लोकप्रियता से कहीं अधिक कई कारकों पर निर्भर करता है। सबसे पहले, इन कंपनियों को जटिल USFDA अप्रूवल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करना होगा, जिसमें उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके बायोसिमिलर मूल उत्पाद जितने ही सुरक्षित और प्रभावी हैं।

दूसरा, कानूनी पहलू एक बड़ी चुनौती है। जब बायोसिमिलर निर्माता बाजार में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं, तो फार्मा उद्योग में अक्सर पेटेंट को लेकर कड़े मुकदमे होते हैं। भले ही बायोसिमिलर तकनीकी रूप से तैयार हो, मूल निर्माता अक्सर अपनी बौद्धिक संपदा (intellectual property) का बचाव करता है, जिससे व्यावसायिक लॉन्च में सालों की देरी हो सकती है। इसके अलावा, Moderna की कॉम्बिनेशन थेरेपी की सफलता वर्तमान में मेलानोमा तक ही सीमित है। यह देखना होगा कि क्या यह कॉम्बिनेशन फेफड़ों या मूत्राशय के कैंसर जैसे अन्य सामान्य कैंसर में भी प्रभावी साबित होता है, जो Keytruda दवा की लॉन्ग-टर्म मांग को तय करेगा।

निवेशकों को अगले महत्वपूर्ण विकास पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें Keytruda से संबंधित पेटेंट मुकदमेबाजी पर अपडेट, इन भारतीय कंपनियों द्वारा USFDA में अप्रूवल के लिए फाइलिंग और व्यापक रोगी समूहों में Moderna-Merck कॉम्बिनेशन थेरेपी की प्रभावशीलता की पुष्टि करने वाले आगे के क्लिनिकल डेटा शामिल हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.