मिडिल ईस्ट संकट का भारतीय फार्मा पर असर: दवाओं की मांग बढ़ी, सप्लाई चेन की परीक्षा

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
मिडिल ईस्ट संकट का भारतीय फार्मा पर असर: दवाओं की मांग बढ़ी, सप्लाई चेन की परीक्षा
Overview

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ज़रूरी दवाओं की मांग में अचानक बड़ा उछाल देखा जा रहा है। इस स्थिति से भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ा फायदा हो सकता है, लेकिन सप्लाई चेन में लॉजिस्टिक्स, कच्चे माल की आपूर्ति और पेमेंट से जुड़ी गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

मांग में तेजी और कीमतों पर दबाव

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव फार्मा सेक्टर के लिए दो तरह की स्थिति बना रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पैनिक बाइंग (Panic Buying) और ज़रूरी दवाओं की जरूरत बढ़ने से मांग में बड़ा इजाफा होगा। इससे दवाओं के दाम भी बढ़ने की उम्मीद है, और ऐसे में भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक ड्रग सप्लायर है, को मार्केट शेयर का फायदा मिल सकता है।

Pharmexcil के आंकड़ों के मुताबिक, GCC देशों (जो भारत के लिए अहम एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन हैं) से भारत के कुल फार्मा एक्सपोर्ट का 5.58% हिस्सा आता है। WANA रीजन में भारत का एक्सपोर्ट FY21 में $1,320.44 मिलियन से बढ़कर FY25 में $1,749.68 मिलियन हो गया। UAE, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और यमन जैसे बड़े बाज़ार दवाओं के लिए भारत पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं।

खासकर, दिल की बीमारियों, डायबिटीज जैसी क्रॉनिक (Chronic) बीमारियों की दवाओं के साथ-साथ एंटीबायोटिक्स (Antibiotics), पेनकिलर (Painkillers) और घाव भरने वाली दवाओं की मांग बढ़ेगी। इंडस्ट्री के जानकारों का अनुमान है कि अगले हफ्ते तक इस बढ़ी हुई मांग का असर दिखने लगेगा।

ऑपरेशनल बाधाओं से निपटना

जहां बिक्री बढ़ने का मौका है, वहीं भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों जैसे Dr Reddy's Laboratories, Sun Pharma, Cipla, Biocon और Lupin के लिए असली परीक्षा ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) को मैनेज करने की है।

इस कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन में लॉजिस्टिक्स (Logistics) की बड़ी दिक्कतें हैं। खासकर दुबई जैसे ट्रांजिट हब (Transit Hub) में कोई भी गड़बड़ी, जो अफ्रीका और गल्फ देशों के लिए दवाएं री-एक्सपोर्ट (Re-export) करने का अहम ज़रिया है, सप्लाई को रोक सकती है।

इसके अलावा, ईरान, इराक और सीरिया जैसे देशों से सीधे कारोबार करने वाली कंपनियों को पेमेंट मिलने में देरी और करेंसी सेटलमेंट (Currency Settlement) की समस्याएं आ सकती हैं।

इंडस्ट्री लीडर्स के मुताबिक, एक और बड़ी चिंता भारत का कुछ ज़रूरी शुरुआती मैटेरियल (Key Starting Materials - KSMs) और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs) के लिए विदेशी निर्भरता है। अगर यह टकराव लंबा खिंचा, तो कच्चे माल की कमी से प्रोडक्शन (Production) रुक सकता है, जो पहले से नाजुक ग्लोबल सप्लाई चेन को और भी कमज़ोर करेगा।

प्रतिस्पर्धी और मैक्रो इकोनॉमिक परिदृश्य

सन फार्मा (Sun Pharma) का P/E रेश्यो करीब 30 और Dr Reddy's का करीब 25 है, जिससे ये कई ग्लोबल प्लेयर्स की तुलना में ज़्यादा किफ़ायती ऑप्शन देते हैं। हालांकि, ये एक बड़े फार्मा मार्केट में काम करते हैं जो मैक्रोइकोनॉमिक (Macroeconomic) बदलावों के प्रति संवेदनशील है।

दुनिया भर में बूढ़ी आबादी के बढ़ने और क्रॉनिक बीमारियों के बढ़ने से ग्लोबल जेनेरिक ड्रग मार्केट (Global Generic Drug Market) में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। पर, भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical Instability) इसमें उतार-चढ़ाव ला सकती है।

ऐतिहासिक तौर पर देखा गया है कि क्षेत्रीय टकराव से फार्मा कंपनियों के शेयरों में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन दवाओं की ज़रूरत हमेशा बनी रहती है, जिससे डिमांड वापस लौट आती है और सप्लाई चेन स्टेबल होने पर लंबे समय में फायदा हो सकता है। Teva Pharmaceuticals और Viatris जैसे कंपटीटर्स भी ग्लोबल लेवल पर मज़बूत हैं, इसलिए भारतीय कंपनियों को सिर्फ़ कीमत ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की भरोसेमंदगी पर भी ध्यान देना होगा।

संभावित जोखिम (Bear Case)

बढ़ती मांग के बावजूद, कई बड़ी बाधाएं मौजूद हैं। कच्चे माल और KSMs के इम्पोर्ट पर निर्भरता, जहां भारत अभी आत्मनिर्भर नहीं है, एक बड़ा जोखिम है।

अगर यह टकराव लंबा चला, तो यह निर्भरता और बढ़ेगी, जिससे दाम बढ़ने के बजाय एक्चुअल शॉर्टेज (Actual Shortage) हो सकती है।

खराब हो चुके शिपिंग रूट्स (Shipping Routes) और प्रभावित देशों में करेंसी की वैल्यू गिरने का खतरा, रेवेन्यू (Revenue) के फायदे को कम कर सकता है।

दुबई जैसे वाइटल री-एक्सपोर्ट हब (Vital Re-export Hub) में कोई भी बड़ी दिक्कत पूरे रीजन की फार्मा सप्लाई पर असर डालेगी। मिडिल ईस्ट के पूर्वी हिस्से पर पश्चिमी हिस्से की तुलना में कम असर पड़ना शायद लॉजिस्टिक्स में थोड़ी आसानी दे, लेकिन यह टकराव के बढ़ने और उसके आर्थिक नतीजों के बड़े रिस्क के मुकाबले मामूली फायदा है।

भविष्य का दृष्टिकोण

भारतीय फार्मा कंपनियां फिलहाल एहतियात बरत रही हैं और स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं, साथ ही प्रोडक्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं।

यह स्थिति का फायदा उठाने की उनकी क्षमता सप्लाई चेन की मज़बूती और लॉजिस्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी (Logistical Flexibility) पर टिकी है।

हालांकि अभी डिमांड मज़बूत दिख रही है, लेकिन लंबे समय पर इसका असर मिडिल ईस्ट के टकराव की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगा, साथ ही भारत की सप्लाई चेन की कमजोरियों को दूर करने और ज़रूरी कच्चे माल को हासिल करने की क्षमता पर भी।

एनालिस्ट्स (Analysts) आम तौर पर भारतीय फार्मा के एक्सपोर्ट में लगातार ग्रोथ का अनुमान लगाते हैं, लेकिन यह भू-राजनीतिक घटना नज़दीकी भविष्य में प्रदर्शन पर असर डालने वाला एक बड़ा रिस्क फैक्टर बन गई है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.