Merck की Ervebo वैक्सीन का Ebola के खिलाफ ट्रायल: क्या यह Bundibugyo स्ट्रेन पर भी करेगी काम?

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Merck की Ervebo वैक्सीन का Ebola के खिलाफ ट्रायल: क्या यह Bundibugyo स्ट्रेन पर भी करेगी काम?

Merck & Co. की Ervebo वैक्सीन को अब Ebola के Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ टेस्ट करने की तैयारी चल रही है। एक नए क्लिनिकल ट्रायल में इस वैक्सीन को एक प्रायोगिक सूडान Ebola वैक्सीन के साथ मिलाकर देने की योजना है, ताकि कांगो में फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को इस घातक वायरस से बचाया जा सके। इस बीच, वर्तमान प्रकोप में अब तक 36 स्वास्थ्यकर्मियों की जान जा चुकी है।

Detailed Coverage

क्या Ervebo Bundibugyo स्ट्रेन पर भी असरदार होगी?

अफ्रीका CDC और Médecins Sans Frontières (MSF) मिलकर कांगो के पूर्वी हिस्से में Ebola वायरस के Bundibugyo स्ट्रेन से लड़ने के लिए एक प्रायोगिक वैक्सीन रणनीति का अध्ययन करने जा रहे हैं। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि क्या Merck & Co. की Ervebo वैक्सीन, जो मुख्य रूप से Zaire Ebola स्ट्रेन के लिए स्वीकृत है, को सूडान Ebola के प्रायोगिक वैक्सीन के साथ मिलाकर देने पर Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ पर्याप्त इम्यूनिटी (Immunity) पैदा हो सकती है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान प्रकोप में अब तक कम से कम 121 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 36 की दुखद मृत्यु हो गई है। अफ्रीका CDC इस अध्ययन को तेजी से शुरू करने के लिए $500,000 तक की प्रारंभिक धनराशि देने पर विचार कर रहा है, बशर्ते सभी नियामक (Regulatory) और नैतिक (Ethical) मंजूरियां मिल जाएं।

अलग-अलग स्ट्रेन में क्रॉस-प्रोटेक्शन की संभावना

मेडिकल समुदाय फिलहाल 'क्रॉस-प्रोटेक्शन' की संभावनाओं का आकलन कर रहा है। इसका मतलब है कि एक वैक्सीन स्ट्रेन के लिए बनाई गई है, क्या वह दूसरे संबंधित स्ट्रेन के खिलाफ भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकती है। हालांकि Ervebo, Bundibugyo स्ट्रेन के प्रति इम्यून रिस्पॉन्स (Immune Response) उत्पन्न करती है, लेकिन इंसानों में वास्तविक बीमारी से बचाव की इसकी क्षमता अभी साबित नहीं हुई है। बंदरों पर हुए पिछले अध्ययनों से पता चला है कि 'प्राइम-बूस्ट' रणनीति (दो अलग-अलग वैक्सीन का उपयोग) इम्यून सिस्टम की सुरक्षा को बढ़ा सकती है। यह ट्रायल सुरक्षा और इम्यून रिस्पॉन्स के महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएगा।

नियामक और नैतिक चिंताएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का रुख अभी सतर्क है। वे Ervebo के Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर उपयोग की सलाह नहीं दे रहे हैं, सिवाय नियंत्रित शोध सेटिंग्स के। स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं कि यदि वैक्सीन संक्रमण को रोकने में विफल रहती है, तो भविष्य के वैक्सीनेशन कार्यक्रमों में जनता का विश्वास कम हो सकता है। दूसरी ओर, MSF के विशेषज्ञों का तर्क है कि स्वास्थ्यकर्मियों के सामने गंभीर जोखिमों को देखते हुए, एक ऐसी प्रणाली की पेशकश करना जो आंशिक सुरक्षा भी प्रदान कर सकती है, नैतिक रूप से उचित है, बशर्ते प्रतिभागियों को सीमित सबूतों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।

स्वास्थ्य क्षेत्र के निवेशक और हितधारक इस विकास पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। पहला, यह ट्रायल मौजूदा वैक्सीन के क्लिनिकल उपयोग के संभावित विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है, जो Ervebo उत्पाद श्रृंखला की दीर्घकालिक उपयोगिता को प्रभावित कर सकता है। दूसरा, यह अध्ययन Ebola की तैयारी के लिए भविष्य की सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय खरीद रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। इस परियोजना के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम नैतिक समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम और उसके बाद अध्ययन का शुभारंभ होगा, जो औपचारिक प्राधिकरण मिलने के दो सप्ताह के भीतर हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.