Max Healthcare: यूके के मरीज की घुटने की सर्जरी ने बढ़ाई भारत की शान, लाखों की बचत!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Max Healthcare: यूके के मरीज की घुटने की सर्जरी ने बढ़ाई भारत की शान, लाखों की बचत!

भारत के मेडिकल टूरिज्म सेक्टर के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। दिल्ली के मैक्स हेल्थकेयर में घुटने की सर्जरी कराने वाले एक ब्रिटिश नागरिक ने इलाज पर करीब **£26,000** (लगभग **₹28 लाख**) की भारी बचत की है। यह मामला पश्चिमी देशों में लंबी वेटिंग लिस्ट से परेशान मरीजों के लिए भारत जैसे देशों के आकर्षण को दर्शाता है।

यूके से भारत तक का सफर

यह मामला Jean Paul नाम के एक ब्रिटिश नागरिक का है, जिन्हें दोनों घुटनों के रिप्लेसमेंट की सर्जरी करानी थी। यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के तहत उन्हें 3 साल का लंबा इंतज़ार करना पड़ता। इस देरी से बचने के लिए उन्होंने भारत का रुख किया और दिल्ली के मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इसका इलाज करवाया।

इलाज का खर्च: भारत बनाम यूके

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में सर्जरी, आने-जाने और रहने का कुल पैकेज करीब £14,000 में पूरा हो गया। वहीं, यूके में इसी प्राइवेट सर्जरी का अनुमानित खर्च £40,000 था। इस तरह, मरीज ने लगभग £26,000 यानी करीब ₹28 लाख की बड़ी बचत की।

हॉस्पिटल्स के लिए बड़ा मौका

Max Healthcare जैसी बड़ी हॉस्पिटल चेन्स के लिए अंतरराष्ट्रीय मरीज एक खास सेगमेंट हैं। ये मरीज घरेलू मरीजों की तुलना में ज़्यादा मुनाफा दिलाते हैं। भले ही घरेलू मरीजों से रेवेन्यू ज़्यादा आता हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मरीजों से मिले मेडिकल वैल्यू ट्रैवल से हॉस्पिटल्स को अपनी हाई-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलिस्ट सर्जिकल स्किल्स का बेहतर इस्तेमाल करने का मौका मिलता है। जैसे-जैसे ये चेन अपनी बेड कैपेसिटी और इक्विपमेंट बढ़ा रही हैं, ऐसे देशों से मरीज लाना एक बड़ी ग्रोथ स्ट्रेटेजी बन गई है जहां हेल्थकेयर का खर्च बहुत ज़्यादा है।

चुनौतियां और निवेशक क्या देखें?

हालांकि, मेडिकल टूरिज्म बिजनेस में कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी हैं। हॉस्पिटल्स को अंतरराष्ट्रीय मरीजों के सपोर्ट, इंश्योरेंस और सर्जरी के बाद की देखभाल के मैनेजमेंट में बहुत तालमेल बिठाना पड़ता है। विदेश से आए मरीजों को प्री-सर्जरी कम्युनिकेशन और पोस्ट-सर्जरी रिहैबिलिटेशन सपोर्ट की ज़्यादा ज़रूरत होती है। किसी भी तरह की देरी या जटिलता हॉस्पिटल की ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा सकती है, जो आगे चलकर नए अंतरराष्ट्रीय मरीजों को लाने के लिए बहुत ज़रूरी है।

निवेशकों के लिए, यह देखना अहम है कि हॉस्पिटल चेन्स अपने अंतरराष्ट्रीय बिजनेस को कैसे बढ़ा रही हैं। यह ग्रोथ सिर्फ सस्ते इलाज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वीज़ा पॉलिसी, भारतीय डॉक्टरों की रेप्युटेशन और हॉस्पिटल्स की क्वालिटी केयर बनाए रखने की क्षमता जैसे फैक्टर्स पर भी टिकी है। इसके अलावा, ग्लोबल ट्रैवल ट्रेंड्स और भू-राजनीतिक स्थिरता भी इस बिजनेस को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.