Q3 में कंपनी ने कैसे मचाया धमाल?
Marksans Pharma Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में जोरदार वापसी की है। कंपनी के नतीजों के मुताबिक, ऑपरेटिंग रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 10.6% बढ़कर ₹754.4 करोड़ हो गया। यह पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले 4.7% की बढ़त है। रेवेन्यू में इस बढ़त के साथ ही, EBITDA में भी 23.2% का तगड़ा उछाल देखने को मिला, जो ₹160.7 करोड़ रहा। इस शानदार परफॉरमेंस के चलते EBITDA मार्जिन में 217 बेसिस पॉइंट (bps) का इजाफा हुआ और यह 21.3% पर पहुंच गया।
तिमाही के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी 8.2% की सालाना बढ़त देखी गई, जो ₹113.7 करोड़ पर रहा।
9 महीने की परफॉरमेंस और वजहें
हालांकि, इस तिमाही की शानदार रिकवरी के बावजूद, फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9M FY26) के नतीजों में थोड़ी नरमी दिखी। इस दौरान, रेवेन्यू 9.4% बढ़कर ₹2,094.8 करोड़ हुआ, लेकिन EBITDA लगभग सपाट (flat) रहा और ₹405.4 करोड़ पर स्थिर रहा। इसके चलते EBITDA मार्जिन में 184 bps की गिरावट आई और यह 19.4% पर आ गया। 9M FY26 का PAT भी 7.1% घटकर ₹271.0 करोड़ पर रहा। मैनेजमेंट ने इसकी वजहें बताते हुए कहा कि साल की शुरुआत में यानी पहली तिमाही में नरमी थी, साथ ही लीज से जुड़े फाइनेंस कॉस्ट में बढ़त और अन्य इनकम (other income) में कमी आई। हालांकि, दूसरी और तीसरी तिमाही में परफॉरमेंस में काफी सुधार हुआ है।
कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ
31 दिसंबर 2025 तक, कंपनी के पास ₹824.2 करोड़ का तगड़ा कैश बैलेंस (cash balance) था। 9MFY26 में ऑपरेशंस से कैश फ्लो ₹263.2 करोड़ रहा, जबकि कैपएक्स (CapEx) ₹97.0 करोड़ था। हिस्टोरिकली, Marksans Pharma ने मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी दिखाई है, जिसमें ROE लगभग 16-17% और ROCE लगभग 20-21% (FY24/25) रहा है। कंपनी का नेट डेट टू EBITDA रेश्यो नेगेटिव (negative) है, जिसका मतलब है कि कंपनी पर कर्ज से ज्यादा कैश है।
आगे की राह और कंपनी का लक्ष्य
मैनेजमेंट को कंपनी के सस्टेनेबल ग्रोथ पर भरोसा है और उनका लक्ष्य अगले एक साल में ₹3,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी यूरोप और कनाडा में नए सब्सिडियरी (subsidiaries) खोलकर ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। साथ ही, नॉर्थ अमेरिका में ओटीसी (OTC - Over-The-Counter) सेगमेंट पर खास फोकस रहेगा, जहां इस रीजन की रेवेन्यू को दोगुना करने का प्लान है। कंपनी यूके मार्केट में टॉप प्लेयर्स में शामिल होने की भी जुगत में है।
हालांकि, इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में नए बाजारों में बिजनेस एस्टेब्लिश करने की चुनौतियां, करेंसी में उतार-चढ़ाव और फार्मा सेक्टर का कम्पटीशन जैसी रिस्क (risk) बनी हुई हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपनी स्ट्रैटेजिक पहलों को लगातार प्रॉफिट में कैसे बदल पाती है, खासकर 9 महीनों के मिले-जुले नतीजों को देखते हुए।
