Mankind Pharma ने कैंसर के एडवांस इलाज 'CAR-T' थेरेपी के क्षेत्र में कदम रखा है। कंपनी बेल्जियम की Armed Cell Therapeutics में **€48 मिलियन** का निवेश कर **70%** हिस्सेदारी हासिल कर रही है।
एक बड़ा रणनीतिक बदलाव
भारत की दिग्गज दवा कंपनी Mankind Pharma अब घरेलू मार्केट से निकलकर ग्लोबल लेवल पर कैंसर रिसर्च में बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी ने अपनी नीदरलैंड की सब्सिडियरी के जरिए बेल्जियम स्थित बायोटेक फर्म Armed Cell Therapeutics में €48 मिलियन यानी करीब ₹430 करोड़ से अधिक का निवेश कर 70% हिस्सेदारी खरीदी है। यह डील कंपनी के पारंपरिक बिजनेस मॉडल से काफी अलग है, जो अब तक जेनेरिक्स और कंज्यूमर हेल्थकेयर पर केंद्रित रहा है।
क्या है यह CAR-T थेरेपी?
इस डील का मुख्य केंद्र CAR-T टेक्नोलॉजी है, जो कैंसर के इलाज में एक नई क्रांति मानी जा रही है। इसमें लैब में मरीज की अपनी इम्यून सेल्स को मॉडिफाई करके कैंसर सेल्स को खत्म करने के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि यह तकनीक काफी एडवांस्ड है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी यह पूरी तरह से 'एक्सपेरिमेंटल स्टेज' पर है। इसका मतलब है कि यह अभी कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं है और इसके क्लिनिकल ट्रायल में काफी लंबा समय और भारी खर्च लग सकता है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
कंपनी के लिए यह एक लंबा और महंगा सफर हो सकता है। फिलहाल कंपनी की कुल कमाई में एक्सपोर्ट का योगदान सिर्फ 15% है, जिसे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन, बायोटेक रिसर्च में जोखिम हमेशा ज्यादा होता है। ड्रग्स को क्लीनिकल ट्रायल के कई फेज पार करने होते हैं, तभी वे बाजार में उतर सकती हैं।
निवेशकों को यह समझना होगा कि यह मौजूदा जेनरिक बिजनेस की तरह नहीं है जो तुरंत कैश फ्लो देता है। आने वाले कई सालों तक यह कंपनी के मुनाफे पर बोझ बन सकता है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि Mankind Pharma इस हाई-कॉस्ट रिसर्च को कैसे मैनेज करती है और ग्लोबल फार्मा दिग्गजों के बीच अपनी जगह कैसे बनाती है।
