Manipal Health Enterprises ने अगस्त 2026 में आए अपने IPO से मिले फंड का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया है। कंपनी ने **₹5,310 करोड़** के भारी-भरकम कर्ज का भुगतान कर अपनी फाइनेंशियल स्थिति को और मजबूत बना लिया है।
कर्ज मुक्त होने की ओर कदम
Manipal Health Enterprises Limited ने ₹5,310 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) का भुगतान पूरा कर लिया है। यह फैसला कंपनी ने अपने IPO के दौरान निवेशकों से किए गए वादे के मुताबिक लिया है। इस कदम से कंपनी के सिर से भारी कर्ज का बोझ हट गया है, जिससे बैलेंस शीट काफी साफ-सुथरी हो गई है।
फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी और मैनेजमेंट का फोकस
दरअसल, कंपनी ने हाल के सालों में Columbia Asia और Sahyadri Hospitals जैसी चेन का अधिग्रहण (Acquisition) कर आक्रामक विस्तार किया था, जिसकी वजह से कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ गया था। CFO समीर अग्रवाल के अनुसार, कर्ज चुकाना मैनेजमेंट की पहली प्राथमिकता थी। इससे न सिर्फ ब्याज का खर्च बचेगा, बल्कि अब कंपनी के पास ऑपरेशन्स में निवेश करने के लिए बेहतर कैश फ्लो उपलब्ध होगा।
शानदार ग्रोथ और मजबूत नेटवर्क
Manipal Health का नेटवर्क आज 13,140 बेड तक पहुंच चुका है। कंपनी के हालिया नतीजे भी इसकी कामयाबी की गवाही दे रहे हैं। Q1 में कंपनी की रेवेन्यू ₹3,091 करोड़ रही, जो कि पिछले साल के मुकाबले 38.1% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹243 करोड़ और EBITDA ₹749 करोड़ रहा है, जिसमें 26.4% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार में कड़ी टक्कर
हेल्थकेयर सेक्टर में Apollo Hospitals, Max Healthcare और Fortis Healthcare जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ Manipal Health की सीधी टक्कर है। जहां कर्ज चुकाना एक पॉजिटिव संकेत है, वहीं अब निवेशकों की निगाहें इस बात पर हैं कि ब्याज के कम खर्च का सीधा असर अगली तिमाही के प्रॉफिट मार्जिन पर कैसे पड़ता है।
