Manipal Health Enterprises के चेयरमैन रंजन पाई ने ऐलान किया है कि कंपनी अब पूरे भारत में तेजी से विस्तार करने के बजाय रीजनल डेंसिटी (क्षेत्रीय मजबूती) पर ध्यान देगी ताकि कामकाज में और बेहतर एफिशिएंसी लाई जा सके।
रीजनल स्ट्रैटेजी का गणित
रंजन पाई ने साफ किया है कि कंपनी का लक्ष्य अब तेजी से हर राज्य में पैर पसारने के बजाय चुनिंदा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना है। वर्तमान में 50 अस्पतालों का संचालन कर रही यह कंपनी अब 'क्लस्टर-बेस्ड' अप्रोच अपना रही है। इस मॉडल को Columbia Asia चेन के अधिग्रहण के दौरान काफी बारीकी से परखा गया था, जिससे अब डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के मैनेजमेंट में बेहतर तालमेल बैठ रहा है। कंपनी का मानना है कि इससे देशभर में एक साथ विस्तार करने पर आने वाली लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल चुनौतियों से बचा जा सकता है।
मेडिकल महंगाई की असली वजह?
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या प्राइवेट इक्विटी का दखल मेडिकल खर्च बढ़ा रहा है? इस पर रंजन पाई ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि महंगाई के पीछे प्राइवेट इक्विटी नहीं, बल्कि डॉलर में खरीदी जाने वाली महंगी मेडिकल टेक्नोलॉजी है। रोबोटिक सर्जरी और एडवांस्ड ऑन्कोलॉजी जैसे आधुनिक उपचारों के लिए विदेशों से आयात की जाने वाली मशीनरी पर होने वाला भारी खर्च ही अस्पतालों के विस्तार बजट को बढ़ा रहा है। हालांकि, उनका दावा है कि इन दबावों के बावजूद भारतीय प्राइवेट अस्पतालों की सेवाएं वैश्विक स्तर पर अभी भी काफी किफायती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि 'स्केल' बनाम 'एफिशिएंसी' की लड़ाई में अब कंपनी दक्षता को तरजीह दे रही है। लॉन्ग टर्म में मार्जिन और स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए यह क्लस्टर मॉडल एक बेहतरीन रणनीति साबित हो सकता है। निवेशक अब लिस्टेड अस्पतालों के Average Revenue Per Occupied Bed (ARPOB) और ऑक्यूपेंसी रेट्स पर नजर रख रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि कौन सी चेन नई तकनीक और लागत के बीच बेहतर संतुलन बना पा रही है।
