Mandrake Bio: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जीन-एडिटिंग में क्रांति, स्टार्टअप ने जुटाए **₹16 करोड़**

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mandrake Bio: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जीन-एडिटिंग में क्रांति, स्टार्टअप ने जुटाए **₹16 करोड़**

बेंगलुरु स्थित बायोटेक स्टार्टअप Mandrake Bio ने जनरेटिव AI का इस्तेमाल कर सिंथेटिक जीन-एडिटिंग प्रोटीन बनाने के लिए **₹16 करोड़** की प्री-सीड फंडिंग जुटाई है।

नई तकनीक से बदल रही है जेनेटिक इंजीनियरिंग

बेंगलुरु का बायोटेक स्टार्टअप Mandrake Bio अब जीन-एडिटिंग की दुनिया को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। कंपनी पारंपरिक बायोफिजिक्स को जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़कर नए तरह के प्रोटीन विकसित कर रही है। इस फंडिंग राउंड में Antler India और Activate जैसे बड़े निवेशकों ने अपना भरोसा जताया है।

पारंपरिक तरीकों की सीमाएं

मौजूदा समय में CRISPR-Cas9 जैसी जीन-एडिटिंग तकनीकें काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन इनमें कुछ चुनौतियां हैं। प्राकृतिक एंजाइम अक्सर आकार में बड़े होते हैं, जिन्हें कोशिकाओं के अंदर पहुँचाना मुश्किल होता है। Mandrake Bio इस समस्या को इंजीनियरिंग की नजर से देख रही है। कंपनी AI मॉडल्स की मदद से ऐसे सिंथेटिक प्रोटीन डिजाइन कर रही है जो आकार में छोटे और काम में ज्यादा सटीक हैं।

काम करने का अनोखा तरीका (Design-Build-Test Cycle)

स्टार्टअप एक निरंतर फीडबैक लूप पर काम कर रहा है। AI द्वारा तैयार किए गए हर प्रोटीन का परीक्षण कंपनी के इन-हाउस लैब में होता है। इस प्रक्रिया का लक्ष्य उन रिसर्च कामों को हफ्तों में पूरा करना है, जिनमें सालों लग जाते थे। कंपनी अब कृषि और चिकित्सीय (therapeutic) सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करने की तैयारी में है।

निवेशकों के लिए सावधानी के संकेत

यह स्टार्टअप अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इसमें रिसर्च और एग्जीक्यूशन का बड़ा जोखिम बना हुआ है। जीन-एडिटिंग में सुरक्षा और प्रभावशीलता की जांच के लिए बेहद कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में पहले से ही कई बड़ी कंपनियां AI-ड्रिवन ड्रग डिस्कवरी में भारी निवेश कर रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.