महाराष्ट्र में प्राइवे’ट हॉस्पिटल्स के लिए नई गाइडलाइन्स: अब पैसिव यूथेनेशिया के लिए बनेगी मेडिकल बोर्ड

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
महाराष्ट्र में प्राइवे’ट हॉस्पिटल्स के लिए नई गाइडलाइन्स: अब पैसिव यूथेनेशिया के लिए बनेगी मेडिकल बोर्ड

महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए प्रदेश के सभी प्राइवे’ट हॉस्पिटल्स को पैसिव यूथेनेशिया (Passive Euthanasia) और लिविंग विल (Living Will) के मामलों की समीक्षा के लिए दो-स्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। यह निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

महाराष्ट्र में पैसिव यूथेनेशिया पर कड़े नियम

महाराष्ट्र सरकार ने यह नया आदेश जारी किया है कि अब प्रदेश के सभी प्राइवे’ट हॉस्पिटल्स को जीवन रक्षक उपचार (Life-Sustaining Treatment) को बंद करने या पैसिव यूथेनेशिया के मामलों पर निर्णय लेने से पहले एक दो-स्तरीय मेडिकल बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें ऐसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष नैदानिक समीक्षा (Clinical Review) पर जोर दिया गया था।

मेडिकल बोर्ड की संरचना

नए नियमों के तहत, प्राइवे’ट हॉस्पिटल्स को दो स्तरों पर मेडिकल बोर्ड बनाने होंगे:

  • प्राइमरी मेडिकल बोर्ड: इसका नेतृत्व हॉस्पिटल के एडमिनिस्ट्रेटर या मेडिकल डायरेक्टर करेंगे। इसमें पेशेंट के इलाज करने वाले डॉक्टर, एक क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट और एक सीनियर फिजिशियन या सर्जन शामिल होंगे। यह बोर्ड मामले का प्रारंभिक मूल्यांकन करेगा।
  • सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड: अंतिम मंजूरी के लिए इस बोर्ड का गठन किया जाएगा। मुंबई के बाहर के जिलों में, यह बोर्ड जिला सिविल सर्जन के अधीन काम करेगा, जिससे स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित होगी। वहीं, मुंबई और उसके उपनगरों में, सेकेंडरी बोर्ड का समन्वय राज्य द्वारा संचालित जेजे हॉस्पिटल (JJ Hospital) के माध्यम से होगा। इस बोर्ड में कम से कम 5 साल का क्लिनिकल अनुभव रखने वाले विषय विशेषज्ञ (Subject Experts) और बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे ताकि मरीज की स्थिति का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

यह कदम प्राइवे’ट हेल्थकेयर सेक्टर को सुप्रीम कोर्ट के 'कॉमन कॉज' (Common Cause) जजमेंट और बाद के 'हरीश राणा' (Harish Rana) मामले में स्थापित कानूनी ढांचे के साथ पूरी तरह से संरेखित करता है। राज्य सरकार का लक्ष्य इन प्रक्रियाओं को मानकीकृत करके अस्पतालों और डॉक्टरों को एंड-ऑफ-लाइफ केयर (End-of-Life Care) निर्णयों को संभालने में कानूनी स्पष्टता प्रदान करना है।

हेल्थकेयर सेक्टर, खासकर हॉस्पिटल्स चेन और प्राइवे’ट मेडिकल ग्रुप्स में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी डेवलपमेंट (Regulatory Development) है। हॉस्पिटल्स को अब इन विशेषज्ञ पैनलों को बनाए रखने और मेडिकल बोर्ड समीक्षाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव रिसोर्सेज (Administrative Resources) समर्पित करने होंगे। यह प्रक्रिया कानूनी सुरक्षा और नैतिक अनुपालन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह क्लिनिकल गवर्नेंस (Clinical Governance) में परिचालन जटिलता (Operational Complexity) भी जोड़ती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि अलग-अलग हॉस्पिटल ग्रुप्स इन बोर्डों को अपने मौजूदा क्लिनिकल वर्कफ़्लो में कैसे एकीकृत करते हैं और इससे उनके अनुपालन लागत (Compliance Costs) और मेडिकल लीगल रिस्क प्रोफाइल (Medical Legal Risk Profiles) पर क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.