महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फार्मा सेक्टर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 880 मैन्युफैक्चरिंग और सेल्स यूनिट्स पर शिकंजा कसा है। अगस्त तक चले तीन महीने के विशेष अभियान में **677** लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं और **203** को रद्द कर दिया गया है।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने जून से अगस्त 2026 के बीच कुल 2,902 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में बढ़ती खामियों को रोकना है। प्रशासन ने न केवल लाइसेंस रद्द किए हैं, बल्कि 104 सर्च-एंड-सीजर ऑपरेशन चलाकर ₹11.41 करोड़ की अवैध दवाएं और कॉस्मेटिक्स बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक 20 FIR दर्ज की गई हैं और 21 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जो यह दर्शाता है कि अब नियामक विभाग सिर्फ चेतावनी नहीं बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई के मूड में है।
अनुपालन (Compliance) का बढ़ता जोखिम
जांच में सामने आया है कि कई यूनिट्स न केवल अनधिकृत दवाएं बना रही थीं, बल्कि रिकॉर्ड-कीपिंग और क्वालिटी कंट्रोल के मानकों को भी दरकिनार कर रही थीं। सबसे गंभीर चिंता 'कोल्ड-चैन' मैनेजमेंट को लेकर है। इंसुलिन और वैक्सीन जैसी जीवन रक्षक दवाएं, जिन्हें निश्चित तापमान पर रखना अनिवार्य है, उन्हें गलत तरीके से स्टोर किया जा रहा था। इसके अलावा, बिना प्रिस्क्रिप्शन के दवा बेचने और फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में दवाओं की बिक्री जैसे मामले भी बड़े पैमाने पर पाए गए हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर पर असर
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में यह सख्त रुख संकेत दे रहा है कि फार्मास्युटिकल सेक्टर में अब 'शॉर्टकट' के दिन खत्म हो गए हैं। जो कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वालिटी एश्योरेंस पर खर्च नहीं कर रही हैं, उनके लिए अपना कारोबार बचाए रखना मुश्किल होगा। यह स्थिति विशेष रूप से उन छोटी और असंगठित कंपनियों के लिए बड़े जोखिम का संकेत है, जिनके पास सिस्टमैटिक मॉनिटरिंग का अभाव है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस सख्ती से अनुपालन लागत (Compliance cost) बढ़ेगी, जिससे सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
