Lupin के सितंबर तिमाही के नतीजों में प्रॉफिट **22.2%** गिरकर **₹1,155.3 करोड़** पर आ गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका में हुआ **₹316 करोड़** का एंटीट्रस्ट लीगल सेटलमेंट है, हालांकि कंपनी का रेवेन्यू **11.1%** बढ़कर **₹7,827.26 करोड़** रहा है।
मुनाफे पर कानूनी पेंच का असर
सितंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Lupin का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 22.2% घटकर ₹1,155.3 करोड़ रहा। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी अमेरिकी सब्सिडियरी, Lupin Pharmaceuticals Inc. से जुड़ा एक एंटीट्रस्ट लीगल सेटलमेंट है। इसके तहत कंपनी को ₹316.28 करोड़ ($35.8 मिलियन) का एकमुश्त जुर्माना चुकाना पड़ा है।
कारोबार में मजबूती बरकरार
कानूनी झटकों के बावजूद, कंपनी का कोर बिजनेस दमदार दिख रहा है। ऑपरेशन से कुल रेवेन्यू 11.1% उछलकर ₹7,827.26 करोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के बाजार में सेल्स 9.3% बढ़कर ₹3,020.2 करोड़ रही, जबकि भारत के घरेलू बाजार में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेल्स में 14.7% का उछाल देखा गया और यह ₹2,383.6 करोड़ रही।
मार्जिन और खर्चों की चुनौतियां
निवेशकों की चिंता का विषय कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन है, जो पिछले साल के 35.6% से घटकर इस बार 27.9% रह गया है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग और कर्मचारियों पर होने वाले खर्चों में बढ़ोतरी है। हालांकि, बैलेंस शीट की बात करें तो 30 सितंबर, 2026 तक कंपनी के पास ₹3,349 करोड़ की नेट कैश पोजीशन है, जो इसे वित्तीय रूप से लचीला बनाए रखती है।
आगे का रास्ता
भविष्य को लेकर अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कंपनी ने कुछ संभावित कानूनी सेटलमेंट के लिए प्रोविजनिंग की है, जिसका असर आने वाली तिमाहियों में भी दिख सकता है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी बढ़ते खर्चों को कंट्रोल करके मार्जिन कैसे सुधारती है और अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार में अपनी ग्रोथ की रफ्तार को कैसे कायम रखती है।
