Laurus Labs का शेयर 52-Week High पर, पर वैल्यूएशन चिंता का सबब

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Laurus Labs का शेयर 52-Week High पर, पर वैल्यूएशन चिंता का सबब
Overview

Laurus Labs के शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि कंपनी का स्टॉक **11 मई 2026** को **₹1,271.70** के अपने 52-Week High पर पहुंच गया। यह उछाल तब आया जब Nifty 50 इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली। हालांकि, इस तेजी के बीच शेयर का वैल्यूएशन (Valuation) चिंता का विषय बन गया है।

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बाजार की गिरावट में भी Laurus Labs की तूफानी तेजी

Laurus Labs के शेयरों ने पिछले साल 114.29% का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि Nifty 50 में इसी दौरान 0.92% की गिरावट आई। 11 मई 2026 को स्टॉक 3.53% चढ़कर ₹1,271.70 पर बंद हुआ और इसने ₹1,274.50 का 52-week high छुआ। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कंपनी पर निवेशकों का खासा भरोसा है, भले ही बाकी बाजार में नरमी हो।

वैल्यूएशन की चिंता: P/E रेशियो पहुंचा 78x

Laurus Labs का मौजूदा P/E (Price-to-Earnings) रेशियो लगभग 78x है, जो पिछले बारह महीनों की कमाई पर आधारित है। यह भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के औसत 29.3x से 33.77x और इसके डायरेक्ट कॉम्पिटिटर्स के औसत 42.3x के मुकाबले काफी ज्यादा है। कुछ एनालिस्ट्स इसे "काफी ओवरवैल्यूड" मान रहे हैं, जिनका फेयर वैल्यू अनुमान मौजूदा ट्रेडिंग प्राइस से काफी कम है। तुलना के लिए, Sun Pharmaceutical Industries का P/E 40.57x, Divi's Laboratories का 70.32x और Torrent Pharma का 64.31x है। यह दिखाता है कि Laurus Labs प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

शेयरहोल्डिंग में बदलाव: DIIs की एंट्री, FIIs की निकासी

शेयरहोल्डिंग पैटर्न में कुछ खास बदलाव दिखे हैं। प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी स्थिर रखी है। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने अपनी हिस्सेदारी पिछले क्वार्टर के 12.42% से बढ़ाकर 13.96% कर दी है। दूसरी ओर, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी थोड़ी घटाकर 25.82% कर ली है। DIIs की यह खरीदारी स्टॉक की मौजूदा मजबूती का एक अहम कारण हो सकती है।

एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय, टारगेट प्राइस कम

कंपनी के CDMO (Contract Development and Manufacturing Organization) सेगमेंट में विस्तार के बावजूद, जो अब रेवेन्यू का 30% हिस्सा है, Laurus Labs वैल्यूएशन की बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है, जिनके औसत प्राइस टारगेट ₹1,027 से ₹1,180 तक हैं। यह मौजूदा स्तरों से 7% से 16% तक की गिरावट का संकेत देता है। उदाहरण के लिए, Goldman Sachs ने 'Sell' रेटिंग के साथ ₹1,000 का टारगेट प्राइस दिया है।

हालांकि कंपनी क्षमता विस्तार में भारी निवेश कर रही है, जिसमें ₹3,000 करोड़ की लागत से पेप्टाइड्स और फर्मेंटेशन के लिए योजनाएं शामिल हैं, कुछ एनालिस्ट्स हाल के प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं। वे मानते हैं कि कंपनी अगले साल हालिया लाभ स्तरों को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकती है। ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें और अंतरराष्ट्रीय मूल्य निर्धारण का दबाव फार्मा सेक्टर के लिए संभावित कमजोरियां बने हुए हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.