Laurus Labs के शेयरों में तूफानी तेजी देखी गई है और स्टॉक ने **₹2,137** का ऑल-टाइम हाई छू लिया है। विदेशी निवेशकों (FPIs) की हिस्सेदारी बढ़कर **30.8%** पहुंच गई है, जो कंपनी के बड़े एक्सपेंशन प्लान के प्रति उनके भरोसे को दिखाता है।
विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
मंगलवार को Laurus Labs के शेयरों में जबरदस्त एक्शन देखने को मिला। पिछले दो ट्रेडिंग सेशंस में ही शेयर 8% तक उछल गया है। इस तेजी के पीछे की बड़ी वजह सितंबर 2026 की तिमाही के आंकड़े हैं, जिनमें विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) ने अपनी हिस्सेदारी 28% से बढ़ाकर 30.8% कर ली है। यह ट्रेंड घरेलू निवेशकों और रिटेल शेयरधारकों की बिकवाली के बिल्कुल उलट है।
बड़े निवेश और एक्सपेंशन का दौर
कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को बदलने के लिए एक बड़े एक्सपेंशन फेज से गुजर रही है। Laurus Labs ने अपने प्लांट और फैसिलिटीज में पहले ही ₹4,300 करोड़ का निवेश कर दिया है, जबकि ₹3,000 करोड़ की अन्य परियोजनाएं अभी पाइपलाइन में हैं। इस भारी निवेश का मुख्य लक्ष्य कंपनी के CDMO (Contract Development and Manufacturing Organization) बिजनेस को नई ऊंचाई पर ले जाना है। कंपनी अब पेप्टाइड्स जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही है, जिनका प्रॉफिट मार्जिन जेनेरिक API बिजनेस की तुलना में काफी बेहतर होता है।
क्या हैं निवेश के रिस्क?
संस्थानों का भरोसा जरूर मजबूत है, लेकिन भारी-भरकम पूंजीगत खर्च (Capex) के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं। बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी, लागत का बढ़ना और एग्जीक्यूशन की चुनौतियां मुनाफा प्रभावित कर सकती हैं। यदि नई कैपेसिटी के हिसाब से मार्केट डिमांड नहीं मिली, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने का दबाव भी कंपनी की बैलेंस शीट पर रहेगा।
आगे की राह
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण इवेंट नई 'पेप्टाइड फैसिलिटी' का शुरू होना है। यह फैसिलिटी कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू में कितनी बड़ी हिस्सेदारी निभाती है, इससे साफ होगा कि मौजूदा स्ट्रैटेजी कितनी कारगर रही। आने वाली तिमाहियों में बाजार कंपनी के कैश फ्लो और कर्ज के स्तर पर बारीक नजर रखेगा।
