भविष्य के लिए बड़ा दांव: ₹390 करोड़ का Capex
Laurus Labs अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए ₹390 करोड़ का बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करने जा रही है, जो FY26 तक चलेगा। इस फंड का 78% हिस्सा कंपनी कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट (API) क्षमताओं को बढ़ाने में खर्च करेगी। Motilal Oswal का मानना है कि यह निवेश कंपनी की ग्रोथ को रफ्तार देगा। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) FY24 में ₹160 करोड़ से बढ़कर FY26 तक ₹850 करोड़ और FY28 तक ₹1,150 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो 16% की CAGR को दर्शाता है। इसी उम्मीद पर Motilal Oswal ने शेयर पर 'Buy' रेटिंग और ₹1,280 का टारगेट प्राइस दिया है।
वैल्यूएशन की चिंताएं और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
हालांकि, Laurus Labs की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर बाजार में चिंताएं भी हैं। कंपनी के मौजूदा फॉरवर्ड P/E रेश्यो 66x से 169x के बीच हैं, जो कि इसके साथियों जैसे Natco Pharma (8.9x), Aurobindo Pharma (19.4x) और Cipla (23.2x) की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि बाजार ने पहले से ही भविष्य की ग्रोथ को काफी हद तक कीमतों में शामिल कर लिया है। इसके अलावा, कंपनी पर ₹2,766 करोड़ का नेट डेट (Net Debt) भी है। हालिया Q3 FY25 नतीजों में, रेवेन्यू में 18% की बढ़ोतरी के बावजूद, जारी निवेशों के कारण नेट प्रॉफिट सिर्फ ₹22 करोड़ रहा, जो दिखाता है कि कैसे निवेश तत्काल लाभप्रदता को कम कर सकते हैं।
विश्लेषकों की मिली-जुली राय
Motilal Oswal के बुलिश (Bullish) आउटलुक के विपरीत, कई अन्य एनालिस्ट्स (Analysts) की राय थोड़ी सतर्क है। MarketsMojo जैसी प्लेटफॉर्म्स पर Laurus Labs को 'Buy' रेटिंग मिली है, वहीं TipRanks से एक एनालिस्ट ने ₹1,170 का टारगेट दिया है। लेकिन MarketScreener पर 'HOLD' की सहमति है, जहाँ औसत टारगेट प्राइस ₹913.47 है। पहले भी Jefferies जैसे ब्रोकरेज हाउस ने शेयर पर कई बार डाउनग्रेड (Downgrade) किया है और टारगेट प्राइस को ₹250-₹480 तक कम किया है। कंपनी का 100x से ऊपर का P/E, अपने ऐतिहासिक औसत और प्रतिस्पर्धियों से काफी ऊपर है, जो इसे किसी भी बड़े झटके के प्रति संवेदनशील बनाता है।
आगे की राह
भारतीय फार्मा सेक्टर में CDMO और API सेगमेंट मजबूत दिख रहे हैं, जहाँ क्रमशः 11% और 12.6% की ग्रोथ का अनुमान है। 'China+1' स्ट्रैटेजी का फायदा भी भारत को मिल रहा है। लेकिन, Laurus Labs के लिए असली चुनौती यह होगी कि वह अपने भारी-भरकम Capex को लगातार और लाभकारी ग्रोथ में कैसे बदल पाती है। कंपनी का कर्ज प्रबंधन और परिचालन कुशलता (Operational Leverage) ही यह तय करेगा कि वह अपने महत्वाकांक्षी ग्रोथ लक्ष्यों को हासिल कर पाएगी या नहीं।