देर रात खाने की आदतें बढ़ा सकती हैं मोटापा, नई स्टडी का खुलासा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
देर रात खाने की आदतें बढ़ा सकती हैं मोटापा, नई स्टडी का खुलासा

फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग देर रात तक जागते हैं, वे अक्सर रात में एनर्जी-डेंस फूड्स का सेवन करते हैं। इससे शरीर में फैट बढ़ता है और मेटाबोलिक हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक सेहतमंद रहने के लिए कैलोरी की मात्रा के साथ-साथ खाने के समय पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।

देर रात खाने का शरीर पर असर

फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन (Frontiers in Nutrition) में पब्लिश हुई एक नई रिसर्च बताती है कि हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक, जिसे क्रोनोटाइप (chronotype) भी कहते हैं, हमारे फिजिकल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है। ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी (Griffith University) के शोधकर्ताओं ने 287 महिलाओं पर रिसर्च की, जिनकी उम्र 18 से 45 साल के बीच थी। उन्होंने पाया कि जो लोग स्वाभाविक रूप से देर रात तक जागना पसंद करते हैं, जिन्हें 'नाइट आउल्स' (night owls) कहा जाता है, उनमें 'मॉर्निंग-टाइप' लोगों की तुलना में बॉडी फैट जमा होने और खराब मेटाबोलिक मार्कर विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है।

खाने के समय का मेटाबोलिज्म पर प्रभाव

स्टडी में पाया गया कि सुबह और शाम के ग्रुप्स के बीच दिन भर की कुल कैलोरी का सेवन तो लगभग बराबर था, लेकिन खाने की आदतों में काफी अंतर था। 'नाइट आउल्स' सुबह कम पोषक तत्व लेते थे और अपनी एनर्जी का सेवन रात के घंटों, खासकर रात 8 बजे से सुबह 3 बजे के बीच बढ़ाते थे। इस पैटर्न में अक्सर ऐसे एनर्जी-डेंस फूड्स (energy-dense foods) का सेवन शामिल होता था जो कार्बोहाइड्रेट और फैट से भरपूर होते थे, ऐसे समय में जब शरीर आराम के लिए तैयार होता है, न कि एनर्जी को प्रोसेस करने के लिए।

इस मेटाबोलिक मिसमैच (metabolic mismatch) के कारण अक्सर ग्लूकोज रेगुलेशन (glucose regulation) और लिपिड प्रोफाइल (lipid profiles) खराब हो जाते हैं, जो मेटाबोलिक बीमारियों के मुख्य संकेत हैं। स्टडी में यह भी पाया गया कि देर रात खाने की आदत वाले लोगों में एंड्रॉइड-टू-ग्य्नोइड रेशियो (android-to-gynoid ratio) - यानी शरीर में फैट के वितरण का माप - ज्यादा था, जो पेट के मोटापे के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है।

क्रोनोन्यूट्रिशन: बचाव की एक रणनीति

ये निष्कर्ष क्रोनोन्यूट्रिशन (chrononutrition) के महत्व पर जोर देते हैं। यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो यह जांचता है कि शरीर की प्राकृतिक लय हमारे खान-पान के साथ कैसे इंटरैक्ट करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, खाने के समय में बदलाव करना लोगों के लिए हेल्थ आउटकम्स (health outcomes) को बेहतर बनाने की एक प्रभावी रणनीति हो सकती है। देर रात एनर्जी-डेंस फूड्स का सेवन कम करने से देर से सोने वालों में मोटापे का खतरा कम हो सकता है।

जो लोग लाइफस्टाइल से जुड़े हेल्थ ट्रेंड्स (health trends) पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह रिसर्च बताती है कि डाइट गाइडेंस (dietary guidance) में कैलोरी की मात्रा और खाने की क्वालिटी पर पारंपरिक ध्यान के साथ-साथ, खाने के समय को भी ज्यादा महत्व देने की जरूरत हो सकती है। इस क्षेत्र में भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य-केंद्रित स्टडीज (health-focused studies) यह और एक्सप्लोर कर सकती हैं कि बेहतर मेटाबोलिक एफिशिएंसी (metabolic efficiency) को सपोर्ट करने के लिए व्यक्तिगत न्यूट्रिशन प्लान (nutrition plans) को किसी व्यक्ति की प्राकृतिक नींद-जागने की साइकिल के साथ कैसे अलाइन किया जा सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.