राजस्थान के कोटा में सिजेरियन (C-section) सर्जरी के बाद किडनी फेल होने के 5 गंभीर मामले सामने आए हैं। इन महिलाओं ने सरकार से तत्काल चिकित्सा सहायता और मुआवजे की मांग की है। यह घटना क्षेत्र में इस्तेमाल की गई खास मेडिकल इंजेक्शन की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के बीच आई है, जिनसे पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं।
कोटा की 5 महिलाओं की गंभीर अपील
राजस्थान के कोटा शहर से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 5 महिलाओं की सिजेरियन (C-section) सर्जरी के बाद किडनी बुरी तरह फेल हो गई है। इन महिलाओं ने भारत की राष्ट्रपति से तत्काल चिकित्सा सहायता और मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है।
ये सभी महिलाएं 4 से 7 मई के बीच अस्पताल में भर्ती हुई थीं। उनकी हालत इतनी गंभीर है कि उन्हें हर 48 घंटे में डायलिसिस करवानी पड़ रही है, ताकि शरीर में पानी जमा न हो और सांस लेने में दिक्कत न हो। महिलाएं किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भी मदद मांग रही हैं।
लापरवाही और घटिया दवाओं का शक
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि यह सब डॉक्टरी लापरवाही और घटिया दर्जे की दवाओं के इस्तेमाल के कारण हुआ है। यह पहली बार नहीं है जब कोटा के अस्पतालों में किडनी फेल होने के ऐसे मामले सामने आए हैं। पहले भी ऐसी घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है।
जांच में यह बात सामने आई है कि इन मामलों का संबंध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन (Oxytocin Injection) की गुणवत्ता से हो सकता है। यह इंजेक्शन आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अत्यधिक खूनस्राव को रोकने के लिए दिया जाता है। इस खुलासे के बाद, अधिकारियों ने संबंधित इंजेक्शन के निर्माण लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई की है।
###WHO और AIIMS की जांच
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारतीय सरकार से इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के हस्तक्षेप के बाद, AIIMS-दिल्ली और AIIMS-जोधपुर के विशेषज्ञों की एक हाई-लेवल जांच कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी मामले की क्लिनिकल और प्रोसीजरल जांच कर रही है।
इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का असली कारण क्या है और सप्लाई चेन में किसकी जिम्मेदारी है, खासकर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Rajasthan Medical Services Corporation Ltd.) के संबंध में।
परिवारों पर टूटा आर्थिक कहर
स्वास्थ्य संकट के साथ-साथ, इन महिलाओं के परिवार भयानक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई महिलाओं के पति नौकरी छोड़कर 24 घंटे उनकी देखभाल में लगे हुए हैं। हालांकि परिवारों ने स्थानीय और राज्य अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन उन्हें अभी तक कोई खास सहायता नहीं मिली है।
अब सभी की निगाहें एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट और सरकारी स्वास्थ्य विभागों के अगले कदम पर टिकी हैं, कि पीड़ितों को मुआवजा और इलाज की सुविधा कब और कैसे मिलेगी।
