केरल सरकार ने कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में एक्सपायर्ड Remdesivir दिए जाने के आरोपों की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। मामला **3,000** वायल (vials) से जुड़ा है, जो **2021** में खरीदी गई थीं और **2023** में एक्सपायर हो गई थीं।
केरल सरकार ने कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में गंभीर अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने पुष्टि की है कि डॉ. अरविंद की अध्यक्षता वाली एक एक्सपर्ट कमेटी इस बात की जांच कर रही है कि मरीजों को एक्सपायर्ड एंटीवायरल दवाएं क्यों दी गईं।\n\nजांच का मुख्य केंद्र 3,000 वायल का स्टॉक है, जिसे 2021 में प्रोक्योर किया गया था। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ये दवाएं मई 2023 में ही एक्सपायर हो चुकी थीं, लेकिन आरोप हैं कि इसके बाद भी इन्हें अस्पताल के सिस्टम में रखा गया। अब जांचकर्ता पेशेंट लॉग और बैच नंबर्स का मिलान कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि इन दवाओं का इस्तेमाल कब और कैसे हुआ।\n\nइस मामले में पैकेजिंग की बड़ी खामियां भी सामने आई हैं। कुछ दवाओं पर मैन्युफैक्चरिंग डेट ही नहीं थी। इसके अलावा, कुछ स्टॉक पर 'क्लिनिकल ट्रायल' का लेबल लगा था, जो सरकारी अस्पताल के मानकों का खुला उल्लंघन है। इन खुलासों के बाद अब 'केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड' की पूरी खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।\n\nसरकार 2021 की 'करुण्या' (Karunya) स्कीम के तहत हुई खरीद की भी ऑडिट कर रही है। इसमें बहरीन से मंगाई गई इमरजेंसी दवाओं में विदेशी मध्यस्थों (intermediaries) की भूमिका और अनधिकृत एजेंट्स के हस्तक्षेप की भी पड़ताल की जा रही है। यह जांच न केवल मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि राज्य की चिकित्सा आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता के लिए भी एक बड़ा टेस्ट साबित होगी।
