रेवेन्यू में तेज़ी, पर मुनाफे पर असर!
Kerala Ayurveda Ltd (KAL) के लिए नौ महीने (YTD Dec'25) के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी की कंसोलिडेटेड कमाई 20.7% बढ़कर ₹108.7 करोड़ हो गई। खासकर, ग्लोबल ई-प्रोडक्ट बिज़नेस में 28% (YTD) और ग्लोबल हेल्थ सर्विसेज सेगमेंट में 27% (YTD) की वृद्धि ने कमाल दिखाया। भारत के ई-कॉमर्स (India Ecomm) सेगमेंट ने भी 40% की ज़बरदस्त ग्रोथ दर्ज की।
निवेशों का असर: मार्जिन पर दबाव
जहां एक ओर कंपनी की टॉप-लाइन (Top-line) मजबूत हुई, वहीं खर्चों में भारी निवेश के चलते कंपनी का मुनाफा (EBITDA) मार्जिन सिकुड़ गया। डिजिटल मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर हुए बड़े खर्च के साथ-साथ ब्याज और डेप्रिसिएशन (depreciation) में बढ़ोतरी के चलते रिपोर्टेड EBITDA मार्जिन काफी कम हो गया। इस वजह से, कंपनी को ₹8.4 करोड़ का PBT (Profit Before Tax) घाटा हुआ। हालांकि, कंपनी ने दो साल बाद प्रोडक्ट की कीमतों में बढ़ोतरी की है, ताकि ग्रॉस मार्जिन को बेहतर बनाया जा सके।
बैलेंस शीट को मजबूत करने की तैयारी
KAL अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। प्रमोटर ग्रुप ₹20 करोड़ के मौजूदा कर्ज को इक्विटी में बदलने की योजना बना रहा है। यह कनवर्जन प्रति शेयर ₹327.99 पर होगा, जो पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस से करीब 32% प्रीमियम पर है।
इसके अलावा, कंपनी अपनी सहायक कंपनी Ayurvedagram Heritage Wellness Centre Private Ltd. (AHWCPL) में शेष 26% हिस्सेदारी ₹10 करोड़ में खरीदेगी। इस अधिग्रहण से AHWCPL पूरी तरह से KAL की सब्सिडियरी (wholly-owned subsidiary) बन जाएगी, जिससे भविष्य में और बेहतर रणनीतिक फायदे मिल सकते हैं। कंपनी अपने नॉन-स्ट्रेटेजिक न्यूट्रास्यूटिकल (Nutraveda) बिज़नेस से बाहर निकलने और अमेरिका में ई-कॉमर्स मार्केटिंग खर्च को कम करने पर भी विचार कर रही है।
मैनेजमेंट का भरोसा और आगे की राह
कंपनी का मैनेजमेंट फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY'26) तक ₹150 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल करने को लेकर आश्वस्त है, जो कि 23% की ग्रोथ होगी। 'विजन 2030' के तहत, कंपनी इस दशक के अंत तक अपनी कमाई ₹1000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। टैलेंट, टेक्नोलॉजी और अंतर्राष्ट्रीय विस्तार में निवेश इसके मुख्य ग्रोथ ड्राइवर होंगे।
हालांकि, मैनेजमेंट ने कुछ जोखिमों को भी स्वीकार किया है, जैसे फंडरेज़िंग में देरी, वर्किंग कैपिटल सपोर्ट में कमी, सप्लाई चेन की चुनौतियां और कुछ एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स में देरी। घाटे (Negative PBT) को रणनीतिक निवेशों का नतीजा बताया गया है।