वैल्यूएशन पर फंसा ₹3000 Cr का सौदा!
Kedaara Capital, जो भारत में न्यूट्रास्यूटिकल यानी स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स बनाने वाली कंपनी Universal NutriScience (UNS) में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है, उसे खरीदारों से झटका लग रहा है। Kedaara इस कंपनी के लिए करीब ₹3,000 करोड़ का वैल्यूएशन चाहती है, जो कि FY26 के अनुमानित EBITDA का लगभग 30 गुना है।
लेकिन, जो संभावित खरीदार इस डील में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, उनका मानना है कि यह वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा है। वे 20 से 25 गुना EBITDA मल्टीपल को ज़्यादा यथार्थवादी मानते हैं। Kedaara Capital फिलहाल लगभग $5.5 बिलियन की एसेट्स मैनेज करती है, और उनका टारगेट FY26 के करीब ₹100 करोड़ के EBITDA पर आधारित है, जबकि कंपनी का रेवेन्यू ₹350-400 करोड़ रहने का अनुमान है।
यह डील ऐसे समय में हो रही है जब भारत का न्यूट्रास्यूटिकल सेक्टर ज़बरदस्त ग्रोथ कर रहा है। यह मार्केट फिलहाल करीब $8 बिलियन का है और 2027 तक 11% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है। हेल्थ कॉन्शियसनेस बढ़ने, डिस्पोजेबल इनकम में इज़ाफ़ा और ऑनलाइन चैनल्स की बढ़ती पैठ इस ग्रोथ की मुख्य वजहें हैं। ग्लोबल लेवल पर भी न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट $520 बिलियन से ज़्यादा का है और 8-9% CAGR से बढ़ रहा है। भारत में 2020 से 2023 के बीच सेक्टर में इन्वेस्टमेंट पिछली अवधि के मुकाबले 2.5 गुना बढ़ा है।
Universal NutriScience की बात करें, तो 2021 में Sanofi India से ₹587 करोड़ में 16 न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड्स (जैसे Seacod) को एक्वायर करके इसका गठन किया गया था। कंपनी ने FY25 में ₹230 करोड़ का रेवेन्यू और ₹61 करोड़ का EBITDA दर्ज किया था।
खरीदारों की नाखुशी और इंडस्ट्री का दबाव
वैल्यूएशन को लेकर यह बड़ा अंतर इस डील को ख़तरे में डाल सकता है। अगर Kedaara Capital अपने वैल्यूएशन टारगेट पर अड़ी रहती है, तो यह डील रद्द हो सकती है। ऐसे में Kedaara को या तो डील के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है या फिर अपनी एग्जिट स्ट्रेटेजी पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।
UNS एक बहुत ही कॉम्पिटिटिव मार्केट में ऑपरेट करती है, जहां Herbalife, Amway, Nestlé और Pfizer जैसे ग्लोबल प्लेयर्स के साथ-साथ ChromaDex और Ritual जैसे स्पेशलाइज्ड ब्रांड्स भी मौजूद हैं। इन बड़ी कंपनियों से मुकाबला करने और ग्रोथ बनाए रखने के लिए लगातार इनोवेशन और मार्केटिंग पर भारी निवेश की ज़रूरत है।
साथ ही, 2021 में Sanofi के ब्रांड्स के अधिग्रहण के बाद इन ब्रांड्स को इंटीग्रेट करना और सिनर्जी का लाभ उठाना एक बड़ी चुनौती है। Kedaara Capital ऑपरेशनल इम्प्रूवमेंट्स के लिए जानी जाती है, लेकिन इतना प्रीमियम वैल्यूएशन शायद भविष्य की उस ग्रोथ को भी कीमत में जोड़ रहा है जो अभी पूरी तरह से साबित नहीं हुई है।