रूस की एक लैब में कर्मचारी की संदिग्ध मौत के बाद करीब **200** लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। रूसी अधिकारी इसे निमोनिया बता रहे हैं, लेकिन ग्लोबल हेल्थ बॉडीज ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए डेटा की मांग की है।
रूस के इर्कुटस्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में 28 साल की कर्मचारी दरिया शिपिलोवा की 2 अक्टूबर, 2026 को हुई मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद एहतियातन करीब 200 लोगों को क्वारंटाइन किया गया, जिसने हाई-कंटेनमेंट रिसर्च फैसिलिटीज की बायो-सेफ्टी प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रूसी अधिकारियों का क्या कहना है?
रूस की कंज्यूमर राइट्स वॉचडॉग, रोस्पोट्रेबनादज़ोर (Rospotrebnadzor) ने इसे 'अज्ञात कारण से हुआ निमोनिया' बताया है। प्लेग फैलने की आशंका के चलते एजेंसी ने करीब 5,000 लोगों के टेस्ट किए। अधिकारियों का दावा है कि किसी में भी 'यर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) बैक्टीरिया नहीं मिला है और स्थिति नियंत्रण में है।
WHO और ECDC की नजर
इन दावों के बावजूद, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) ने मास्को से विस्तृत और ग्राजुलर डेटा मांगा है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्र डेटा के अभाव में जोखिम का आकलन करना मुश्किल है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि घटना पूरी तरह से लैब के अंदर ही सीमित रही हो।
हालांकि इस घटना का शेयर बाजार पर सीधा असर नहीं है, लेकिन ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी की दृष्टि से यह एक अहम घटना है। आगे आने वाली जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्या लैब में सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई चूक हुई थी।
