डेन्वर स्थित स्टार्टअप Intero Biosystems अपनी 'GastroScreen' टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर उतारने की तैयारी कर रही है। यह लैब में तैयार ह्यूमन ऑर्गनॉइड्स (Organoids) के जरिए पारंपरिक एनिमल टेस्टिंग को रिप्लेस करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसे अब FDA से भी नियामक सपोर्ट मिल रहा है।
दवाओं और केमिकल की टेस्टिंग के लिए अब फार्मा कंपनियां जानवरों पर निर्भरता कम करने के तरीके ढूंढ रही हैं। इसी बदलाव की दिशा में डेन्वर की स्टार्टअप Intero Biosystems अपनी 'GastroScreen' तकनीक के साथ आगे बढ़ रही है। यह कंपनी इंसानी स्टेम सेल्स का उपयोग करके लैब में आंतों के ऑर्गनॉइड्स तैयार करती है, जो दवाओं के प्रति इंसानी शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।\n\n### बिजनेस मॉडल और कमाई\nकंपनी का बिजनेस मॉडल इन 1 मिलीमीटर के ऑर्गनॉइड्स को फार्मा और केमिकल कंपनियों को बेचना है। यह कंपनियां इनका उपयोग दवाओं के परीक्षण या बीमारियों के सिमुलेशन के लिए करती हैं। कंपनी ने साल 2023 के अंत से 2024 की तीसरी तिमाही के बीच $4,00,000 से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया है। हालांकि, अभी कंपनी ग्रोथ फेज में है और इसका पूरा जोर मैन्युफैक्चरिंग को ऑटोमेट करने पर है, ताकि उत्पादन को हजारों से बढ़ाकर लाखों यूनिट्स प्रति बैच किया जा सके।\n\n### नियामक बदलाव और चुनौतियां\nIntero Biosystems और इसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों जैसे Altis Biosystems और InSphero के लिए सबसे बड़ा बूस्ट अमेरिका के FDA से आया है। नए दिशा-निर्देशों में नॉन-एनिमल टेस्टिंग विधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।\n\nहालांकि, राह आसान नहीं है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लैब की सीमित टेस्टिंग को बड़े पैमाने पर ऑटोमेट करने की है। इसके अलावा, कंपनी अभी अपने तीन-चरणीय वैलिडेशन प्रोसेस के बीच में है। जब तक यह तकनीक पूरी तरह से क्लिनिकल डेटा के मानकों पर खरी नहीं उतरती, तब तक इसे एनिमल टेस्टिंग का पूर्ण विकल्प मानना अभी जल्दबाजी होगी। निवेशकों के लिए इसकी ऑटोमेशन सफलता और आगामी वैलिडेशन रिपोर्ट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
