दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने 23 महीने के जुड़वां बच्चों पर लिवर ट्रांसप्लांट का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह दोनों बच्चे फिलिपींस के रहने वाले हैं और जन्म से ही एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे।
दुर्लभ ऑपरेशन, बड़ी कामयाबी
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में एक बार फिर मेडिकल जगत में अपनी धाक जमाई है। अस्पताल ने 23 महीने के फिलिपींस के जुड़वां बच्चों, टायलर और केली पर लिवर ट्रांसप्लांट के दो जटिल ऑपरेशन, एक के बाद एक सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। ये दोनों बच्चे एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी, 'कोलेडॉकल सिस्ट टाइप IVA' से पीड़ित थे। इस बीमारी में लिवर की नलिकाएं (Bile Ducts) सूज जाती हैं, और अगर इसका समय पर इलाज न हो तो लिवर फेलियर का गंभीर खतरा हो सकता है।
डॉ. अनुपम सिबल और डॉ. नीरव गोयल की टीम का कमाल
इस पूरे ऑपरेशन को डॉ. अनुपम सिबल और डॉ. नीरव गोयल की विशेषज्ञ टीम ने अंजाम दिया। बच्चों के लिवर का एक-एक हिस्सा उनकी मां और मामा ने डोनेट किया, जिसके बाद टीम ने बारी-बारी से दोनों बच्चों के शरीर में ट्रांसप्लांट किया। इस तरह के जटिल ऑपरेशन अस्पताल की ट्रांसप्लांट क्षमता को दर्शाते हैं, जो अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड के लिए एक महत्वपूर्ण क्लीनिकल ऑपरेशन और रेवेन्यू का सोर्स है। दुर्लभ पीडियाट्रिक सर्जरी में महारत हासिल कर अस्पताल ने अपनी साख को और मजबूत किया है, जो भारत में एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट की तलाश कर रहे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मरीजों के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है।
मेडिकल टूरिज्म में भारत का दबदबा
भारत आजकल इंटरनेशनल मरीजों के लिए एक बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है, खासकर लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी के लिए। पश्चिमी देशों की तुलना में यहां इलाज का खर्च कम है और मेडिकल प्रोफेशनल्स भी बेहद कुशल हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स के लिए ऐसे जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक करना, मेडिकल टूरिज्म मार्केट में उनकी पोजीशन को और मजबूत करता है। यह सेगमेंट अस्पताल ग्रुप के सर्विस रेवेन्यू में योगदान देता है और उनके स्पेशलाइज्ड यूनिट्स में हाई ऑक्यूपेंसी रेट बनाए रखने में मदद करता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अस्पताल सेक्टर में निवेशकों की नजरें कुछ खास चीजों पर टिकी रहती हैं, जैसे कि प्रति बेड औसत रेवेन्यू, बेड ऑक्यूपेंसी रेट और मेडिकल टेक्नोलॉजी व टैलेंट पर बढ़ते खर्च के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता। जहां एक ओर ये क्लीनिकल अचीवमेंट्स अस्पताल की क्वालिटी और एक्सपर्टाइज को दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर इसका फाइनेंशियल असर डोमेस्टिक और इंटरनेशनल मरीजों की लगातार आती संख्या पर निर्भर करता है। निवेशक किसी भी हॉस्पिटल चेन की लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू ग्रोथ को मापने के लिए स्पेशलाइज्ड सेंटर्स के परफॉरमेंस पर नजर रखते हैं।
भविष्य में, अस्पताल की परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने ऑपरेशनल खर्चों को कैसे मैनेज करता है और ऐसे कॉम्प्लिकेटेड केस को कैसे आकर्षित करता रहता है जिनके लिए हाई-एंड मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती है। मरीजों की संख्या, नए क्षेत्रों में विस्तार और एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन पर नियमित अपडेट्स, इस ग्रुप के फाइनेंशियल फ्यूचर को आंकने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
