GST काउंसिल का बड़ा ऐलान: कैंसर के मरीजों को मिली भारी राहत
हाल ही में हुई 56वीं GST काउंसिल की बैठक में स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि 33 जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर GST को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले इन पर 12% या 5% तक GST लगता था, जिसे अब घटाकर 0% कर दिया गया है। इसके अलावा, ज्यादातर दूसरी दवाओं पर भी GST की दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। मेडिकल उपकरण और डिवाइस पर भी GST की दर 18% या 12% से घटाकर 5% कर दी गई है।
स्वास्थ्य बीमा हुआ सस्ता, तंबाकू पर बढ़ा टैक्स
यही नहीं, इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर पहले लगने वाला 18% GST भी अब पूरी तरह माफ कर दिया गया है। इससे इंश्योरेंस प्रीमियम काफी कम हो जाएगा, जिससे ज्यादा लोग स्वास्थ्य बीमा का फायदा उठा सकेंगे। वहीं, दूसरी ओर, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और कैंसर देखभाल के लिए फंड जुटाने के मकसद से तंबाकू उत्पादों पर GST की नई दर 40% लागू की गई है।
इलाज का खर्च घटेगा, फंड जुटाने की कोशिश
इन टैक्स में कटौती का सीधा मकसद मरीजों के जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है। खास तौर पर कैंसर जैसी महंगी बीमारियों के इलाज में यह बड़ी राहत देगा। वहीं, तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इससे होने वाली कमाई कैंसर के इलाज और रोकथाम के कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो। हालांकि, यह जानना अहम है कि भारत में ऐतिहासिक रूप से तंबाकू पर टैक्स दरें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों से काफी कम रही हैं। WHO जहाँ 70% टैक्स की सिफारिश करता है, वहीं पहले सिगरेट की खुदरा कीमतों का करीब 38% ही टैक्स के रूप में जाता था।
क्या फायदे ग्राहकों तक पहुंचेंगे? - बड़े सवाल
लेकिन इन अच्छे कदमों के साथ कुछ बड़े सवाल भी खड़े होते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या दवा निर्माता कंपनियां और विक्रेता इस टैक्स कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएंगे? अभी इस बात पर संदेह है कि क्या कीमतों में कमी वाकई में मरीजों को मिलेगी या कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ा लेंगी। इसके अलावा, तंबाकू से होने वाली बढ़ी हुई कमाई क्या कैंसर केयर के लिए पर्याप्त होगी, यह भी देखना होगा।
बीमा कंपनियों के लिए 18% GST माफ होने का मतलब है कि उन्हें अब एजेंट कमीशन और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नहीं मिलेगा। इससे उनकी लागत बढ़ सकती है और वे भविष्य में प्रीमियम बढ़ा सकते हैं। फार्मा सेक्टर को भी 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जहाँ इनपुट टैक्स, आउटपुट टैक्स से ज़्यादा हो जाता है। इससे कंपनियों की कार्यशील पूंजी (working capital) पर दबाव आ सकता है।
आगे क्या? - भविष्य का नज़रिया
जानकारों का मानना है कि इन GST सुधारों का असर कुछ हद तक कंपनियों के कामकाज और मरीजों के इलाज के खर्च पर पड़ेगा। भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद बनी हुई है, जो फाइनेंशियल ईयर 26 तक करीब 15% की दर से बढ़ सकता है। फार्मा कंपनियों के लिए भी 9-10% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, इन सुधारों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इन्हें कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती है और इंडस्ट्री के खिलाड़ी कितने पारदर्शी तरीके से इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।