भारत का Ayush सर्विसेज सेक्टर तेजी से उभर रहा है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में **$36.92 बिलियन** के वैल्यूएशन तक पहुंच गया है। लगभग **17%** की सालाना दर से बढ़ते इस सेक्टर के 2047 तक **$318 बिलियन** के आंकड़े को छूने का अनुमान है।
भारत का Ayush सेक्टर अब केवल एक ट्रेडिशनल विकल्प नहीं, बल्कि नेशनल इकॉनमी का एक मजबूत हिस्सा बन चुका है। 'Research and Information System for Developing Countries' (RIS) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में इस सेक्टर ने $36.92 बिलियन का रेवेन्यू जेनरेट किया है। खास बात यह है कि 2022-23 से यह सेक्टर हर साल लगभग 17% की ग्रोथ दिखा रहा है। अभी के आंकड़ों के मुताबिक, क्लीनिक और डे-केयर फैसिलिटीज कुल रेवेन्यू का 71% से ज्यादा हिस्सा संभाल रही हैं।
सेगमेंट की ताकत और मेडिकल टूरिज्म
मार्केट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी आयुर्वेद की है, जिसका योगदान $17.73 बिलियन या कुल रेवेन्यू का करीब 48% है। दूसरी तरफ, वेलनेस सेगमेंट (योग और स्पेशलाइज्ड रिसॉर्ट्स) 21% से ज्यादा की सालाना दर से सबसे तेज गति से बढ़ रहा है। 'मेडिकल वैल्यू ट्रैवल' यानी विदेश से आने वाले मरीज इस ग्रोथ का बड़ा इंजन हैं। हालांकि, ये इंटरनेशनल विजिटर्स कुल मरीजों का सिर्फ 5% हैं, लेकिन हॉस्पिटल सेगमेंट में इनका रेवेन्यू योगदान 15% से 25% तक है क्योंकि इनका इलाज लंबा और स्पेशलाइज्ड होता है।
डिजिटल और क्वालिटी का महत्व
अब सफलता का पैमाना डिजिटल एक्सेस और क्वालिटी सर्टिफिकेशन बन गया है। जिन प्रोवाइडर्स के पास अपनी वेबसाइट है, उन्हें विदेश से तीन गुना ज्यादा इन्क्वायरी मिल रही है। NABH या ISO जैसे सर्टिफिकेशन भरोसे की नींव बन गए हैं, क्योंकि सर्टिफाइड सेंटर्स में मरीजों का जुड़ाव (Engagement) सामान्य सेंटर्स के मुकाबले दोगुना देखा गया है। 2047 के $318 बिलियन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश जरूरी है।
निवेशकों के लिए संकेत
इस सेक्टर का फॉर्मूला अब बदल रहा है। Dabur और Emami जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही पारंपरिक चिकित्सा में अपनी जगह बना चुकी हैं, लेकिन निवेशकों की नजर अब क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और क्लीनिकल डेटा पर है। ग्लोबल मार्केट में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए रिसर्च-बेस्ड डेटा और सरकारी रेगुलेशन का पालन सबसे अहम होगा।
