जेनेरिक दवाओं से छिड़ी प्राइस वॉर, बाजार का नया बंटवारा
जेनेरिक Semaglutide के आने से कीमतों की जंग छिड़ गई है। पहले जहां इस दवा का मासिक इलाज ₹8,800 से ₹16,400 तक आता था, वहीं अब जेनेरिक वर्जन ₹1,290 से ₹8,000 में उपलब्ध हैं। वायल (Vial) वाले वर्जन सबसे सस्ते हैं, जिनकी कीमत ₹1,290 से ₹1,750 प्रति माह है, जबकि पेन (Pen) डिवाइस ₹1,800 से ₹8,000 तक मिल रहे हैं। इस भारी गिरावट ने बाजार को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। Alkem, Natco Pharma, Eris Lifesciences और Glenmark Pharmaceuticals जैसी कंपनियां कम कीमतों के साथ बाजार में उतर रही हैं। Zydus Lifesciences मिड-टियर को टारगेट कर रही है, जबकि Sun Pharma और Dr Reddy's Laboratories जैसी बड़ी कंपनियां हाई-एंड जेनेरिक सेगमेंट पर फोकस कर रही हैं।
विश्लेषकों को $1.5 बिलियन के बाजार का अनुमान
विश्लेषकों का मानना है कि यह बाजार वॉल्यूम पर चलेगा, जिसमें टॉप तीन से चार कंपनियां बड़ा हिस्सा हासिल करेंगी। कंपनियां पेशेंट सपोर्ट प्रोग्राम (Patient Support Programs) जैसे तरीके भी अपना रही हैं। Dr Reddy's ने Nestle के साथ मिलकर SEMAKARE सर्विस शुरू की है। बाजार का कुल आकार मौजूदा ₹1,400 करोड़ से बढ़कर ₹8,300 करोड़ तक पहुंच सकता है, और लंबी अवधि में यह ₹28,500 करोड़ तक भी जा सकता है। Goldman Sachs का अनुमान है कि भारतीय GLP-1 बाजार FY31 तक $1.5 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसका मुख्य कारण जेनेरिक उपलब्धता के बाद बिक्री में भारी वृद्धि होगी।
नई रणनीतियों से कंपनियां बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा करने की फिराक में
CLSA ने Sun Pharma और Torrent Pharma को प्राथमिकता दी है, क्योंकि वे बड़ी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं। Torrent Pharma के पास ओरल वर्जन (Oral Versions) के साथ जल्दी बाजार में उतरने का अतिरिक्त फायदा है। Macquarie ने Zydus जैसी कंपनियों के इनोवेशन (Innovation) और यूनिक डिवाइस (Unique Device) अप्रोच की सराहना की है। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा से कीमतों में और बदलाव और नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट की उम्मीद है, क्योंकि अलग-अलग फॉर्मेट उपलब्ध होंगे और इस बढ़ते ट्रीटमेंट सेगमेंट का भविष्य तय होगा।
