भारतीय फार्मा सेक्टर ने दूसरी तिमाही में **12%** से **13.5%** की दमदार ग्रोथ दर्ज की है। क्रॉनिक बीमारियों की दवाओं की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में रौनक है, लेकिन अमेरिका में सुस्त कारोबार और बढ़ती लागत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय फार्मा सेक्टर फिलहाल एक नए दौर से गुजर रहा है। दूसरी तिमाही में रेवेन्यू में 12% से 13.5% का इजाफा इस बात का सबूत है कि घरेलू बाजार ने रफ्तार पकड़ ली है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी सुस्ती के बीच, देश के भीतर दवाओं की मांग कंपनियों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है।
क्रॉनिक बीमारियों की दवाओं की बढ़ती मांग
ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ी वजह कार्डियोलॉजी, डायबिटीज और ऑन्कोलॉजी जैसी लंबी अवधि की बीमारियों का इलाज है। सबसे अहम बात यह है कि यह ग्रोथ केवल दवाओं की कीमतें बढ़ने से नहीं, बल्कि बिक्री की 'वॉल्यूम' (Volume) बढ़ने से आई है। Sun Pharmaceutical Industries, Zydus Lifesciences, Glenmark Pharmaceuticals और Torrent Pharmaceuticals जैसी बड़ी कंपनियां इस घरेलू उछाल का सीधा फायदा उठा रही हैं।
अमेरिका का दबाव और मार्जिन की चुनौती
घरेलू बाजार की मजबूती के बावजूद, अमेरिका में कारोबार अभी भी चुनौतियों से घिरा है। वहां कीमतों में लगातार गिरावट और नए जेनरिक ड्रग्स के लॉन्च न होने से रेवेन्यू पर असर पड़ा है। इसके अलावा, निवेशकों की नजर अब कंपनियों के मुनाफे पर है। कच्चे माल, एनर्जी और फ्रेट (Freight) की बढ़ती लागत के कारण कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन में 150 से 200 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखी जा सकती है।
आने वाले समय में सेक्टर की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बढ़ते खर्चों को कैसे मैनेज करती हैं। क्या घरेलू वॉल्यूम ग्रोथ, अमेरिकी बाजार के दबाव को झेलने के लिए काफी होगी? यह अब देखना दिलचस्प होगा।
