भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए साल **2027** काफी उम्मीद भरा दिख रहा है। निर्यात (Exports) और घरेलू मांग के दम पर सेक्टर की रेवेन्यू में **11-13%** की बढ़त का अनुमान है, लेकिन बढ़ते खर्च निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं।
ग्रोथ की रफ्तार और नई रणनीति
Crisil Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, फार्मा सेक्टर में जबरदस्त तेजी के पीछे निर्यात का विविधीकरण (Diversification) मुख्य कारण है। कंपनियां अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं और यूरोप के बाजारों में कॉम्प्लेक्स प्रोडक्ट्स और बायोसिमिलर्स (Biosimilars) के जरिए पैठ जमा रही हैं। इसके अलावा, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में ब्रांडेड जेनरिक की बढ़ती मांग से एक्सपोर्ट में 14-16% की ग्रोथ की उम्मीद है।
घरेलू बाजार का हाल
घरेलू स्तर पर भी सुस्त पड़ती मांग में जान फूंकी जा रही है, जहां 9-11% की ग्रोथ का अनुमान है। पुरानी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Lifestyle-related diseases) के चलते दवाइयों की खपत बढ़ रही है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि वॉल्यूम ग्रोथ पिछले दो सालों के 2% के स्तर से सुधरकर 4-5% पर पहुंच जाएगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क इसका बड़ा सहारा है।
मार्जिन पर दबाव का पेंच
कमाई तो बढ़ रही है, लेकिन मुनाफा कमाना चुनौती बनता जा रहा है। कच्चे माल (Raw Materials), एनर्जी और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से ऑपरेटिंग मार्जिन 150-200 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 21.0-21.5% के दायरे में रह सकता है। पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
हालाँकि, अधिकांश बड़ी कंपनियों के पास मजबूत बैलेंस शीट है, जो उन्हें इस लागत के झटके को सहने में मदद करेगी। निवेशकों को अब यह ट्रैक करना होगा कि ये कंपनियां अपनी बढ़ी हुई ऑपरेशनल कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं और अपने नेट प्रॉफिट को बचाने के लिए क्या रणनीतियां अपनाती हैं।
