Indian Pharma Q1 FY27: घरेलू मांग से रफ्तार, पर अमेरिकी बाजार में दबाव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Pharma Q1 FY27: घरेलू मांग से रफ्तार, पर अमेरिकी बाजार में दबाव

भारतीय फार्मा कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में **13-15%** के रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं। यह तेजी मुख्य रूप से घरेलू बाजार की मजबूत मांग के कारण है, लेकिन अमेरिकी बाजार में घटती बिक्री और बढ़ती लागतों के चलते प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।

Detailed Coverage

घरेलू बाजार में बंपर ग्रोथ, अमेरिकी बाजार में चुनौतियां

FY27 की पहली तिमाही में भारतीय फार्मा कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहने की आशंका है। जहां एक ओर डोमेस्टिक (घरेलू) सेल्स में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी बाजार की मुश्किलें कंपनी की कुल कमाई पर असर डाल सकती हैं। HDFC Securities और Nuvama जैसी ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि सेक्टर का रेवेन्यू 13% से 15% तक बढ़ सकता है, लेकिन नेट प्रॉफिट में करीब 13% की गिरावट आ सकती है।

घरेलू मांग बनी सहारा

अप्रैल और मई 2026 के दौरान, डोमेस्टिक फॉर्मूलेशन मार्केट में 12% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है, जो पिछले तीन साल की तिमाही औसत 9% से काफी बेहतर है। अगर JB Chemicals का Torrent Pharma में इंटीग्रेशन जैसे स्ट्रैटेजिक मूव्स को भी शामिल कर लें, तो यह ग्रोथ 17% तक पहुंच सकती है। खासकर ऑन्कोलॉजी (कैंसर), एंटी-डायबिटिक (जैसे GLP-1 ड्रग्स) और कार्डियक सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ दिख रही है। Zydus Lifesciences, Torrent Pharma, Sun Pharma और Dr. Reddy's Laboratories जैसी कंपनियां इस डोमेस्टिक एक्सपेंशन का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं।

अमेरिकी बाजार में रेट इरोजन (Price Erosion) और लागत का खेल

वहीं, अमेरिका में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यहां जेनेरिक दवाओं की कड़ी प्रतिस्पर्धा और Revlimid जैसी हाई-वैल्यू दवाओं का असर कम होने के कारण रेवेन्यू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। कई बड़ी कंपनियों के अमेरिकी रेवेन्यू में 5% की सालाना गिरावट का अनुमान है। बेस जेनेरिक बिजनेस में लगातार प्राइस इरोजन (कीमतों में गिरावट) देखा जा रहा है और नए प्रोडक्ट्स की कमी रिकवरी को मुश्किल बना रही है।

इसके अलावा, इनपुट कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) में बढ़ोतरी, R&D पर लगातार खर्च और सेल्स, जनरल व एडमिनिस्ट्रेटिव (SG&A) एक्सपेंस में इजाफे के चलते प्रॉफिट मार्जिन पर भी दबाव है। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग (CRDMO) सेगमेंट अपनी मार्जिन बनाए रखने की उम्मीद है, लेकिन ओवरऑल प्रॉफिट रेवेन्यू ग्रोथ से पिछड़ सकता है। Aurobindo Pharma एक संभावित अपवाद हो सकती है, जिसके अमेरिकी रेवेन्यू में 9% की ग्रोथ का अनुमान है, जो फेवरेबल करेंसी रेट्स और जेनेरिक Pomalyst के लॉन्च से संभव है।

निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों पर रहेगी कि कंपनियां मार्जिन के दबाव से कैसे निपटती हैं और क्या डोमेस्टिक ग्रोथ अपनी रफ्तार बनाए रख पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.