GLP-1 वेट-लॉस दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच भारतीय फार्मा कंपनियां अब न्यूट्रास्युटिकल बाजार में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। Sun Pharma, USV और Cipla जैसी दिग्गज कंपनियां इस मौके को भुनाने के लिए बड़े अधिग्रहण कर रही हैं, हालांकि निवेशकों को रेगुलेटरी रिस्क पर नजर रखनी होगी।
भारत की दिग्गज फार्मा कंपनियां अब पारंपरिक दवाओं से हटकर तेजी से बढ़ते 'न्यूट्रास्युटिकल्स' और वेलनेस बाजार की ओर रुख कर रही हैं। यह रणनीतिक बदलाव GLP-1 वेट-लॉस दवाओं जैसे कि semaglutide और tirzepatide के व्यापक इस्तेमाल के बाद आया है, जिसने मरीजों की खान-पान की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है।
चूंकि ये दवाएं भूख को नियंत्रित करती हैं, इसलिए शरीर में कैलोरी और पोषक तत्वों की कमी होना स्वाभाविक है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अब सप्लीमेंट्स की मांग बढ़ गई है। भारत के न्यूट्रास्युटिकल सेक्टर में अगस्त 2026 तक 16.2% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है।
कंपनियों का बड़ा दांव और अधिग्रहण:
बड़ी फार्मा कंपनियां इस सेगमेंट में अपनी पैठ जमाने के लिए भारी निवेश कर रही हैं:
- Sun Pharmaceutical Industries ने जुलाई 2026 में Innovcare Lifesciences का 100% अधिग्रहण ₹271.2 करोड़ में पूरा किया है।
- USV Private Limited ने ₹1,583 करोड़ के कैश डील के जरिए Wellbeing Nutrition की पैरेंट कंपनी Nutritionalab में 79% हिस्सेदारी खरीदी है।
- Cipla ने भी अपनी सब्सिडियरी Inzpera Healthsciences का विलय पूरा कर लिया है ताकि वेलनेस उत्पादों की रेंज को मजबूत किया जा सके।
निवेशकों के लिए जोखिम:
यह नया बिजनेस मॉडल कमाई के नए रास्ते तो खोलता है, लेकिन इसमें चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अगस्त 2026 तक GLP-1 मार्केट में स्थिरता के संकेत मिले हैं, जिसका मतलब है कि शुरुआती उछाल अब ठंडा पड़ रहा है। इसका सीधा असर इन महंगे अधिग्रहणों से मिलने वाले लॉन्ग-टर्म रिटर्न पर पड़ सकता है। इसके अलावा, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से दवाओं की कीमतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यदि मेटाबॉलिक या डायबिटीज से जुड़ी दवाओं पर नए प्राइस कंट्रोल लागू होते हैं, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
